टीचर ने चोदना सिखाया

लेखक: अंजान


मेरा नाम रितेश है। ये कहानी नब्बे के दशक के शुरू की है। घर में मैं और मेरे पापा ही थे क्योंकि जब मैं चार साल का था तब मम्मी का स्वर्गवास हो गया था। पापा बिज़नेसमैन थे और पैसों की कोई कमी नहीं थी। पापा मेरी हर इच्छा पूरी करते थे।

उस वक्त मैं सातवीं क्लास में पढ़ता था। मेरी टीचर रशीदा मैडम मेरी क्लास में सायंस पढ़ाती थी। मैं सायंस में थोड़ा कमज़ोर था। इसलिये पापा ने मैडम से रिक्वेस्ट की कि वो शाम को मुझे घर पर ट्यूशन दे दें। रशीदा मैडम के हसबैंड दो साल से कुवैत में नौकरी रहे थे और उनके दोनों बच्चे मसूरी में बोर्डिंग स्कूल में थे। इसलिये मैडम अकेली ही रहती थी और फिर पापा ने उन्हें फीस भी काफी अच्छी ऑफर करी थी तो रशीदा मैडम मान गयी और मेरे घर पढ़ाने आने लगी।

रशीदा मैडम किनेटिक होंडा स्कूटर से शाम को छः बजे मुझे पढ़ाने आती थीं और कईं बार हमारा ड्राइवर रशीदा मैडम को कार से भी लेने और छोड़ने जाता था। जिस वक्त रशीदा मैडम आती थी उस समय घर में बस मैं और हमारा नौकर ही होते थे। पापा तो ज्यादातर उस समय ऑफिस में होते थे। नौकर उनके लिये जूस वगैरह रख जाता था और फिर वो मेरे स्टडी रूम में मुझे पढ़ाती थीं। स्कूल में रशीदा मैडम काफी स्ट्रिक्ट थीं लेकिन घर पे काफी फ्रेंडली तरीके से पढ़ाती थीं और हंसी-मज़ाक भी करती थीं। कभी मेरे गाल खींच देतीं तो कभी गले से लगा लेतीं और मेरे जिस्म पे कहीं ना कहीं प्यार से हाथ फिरा देतीं। ये सब मुझे उनका सामान्य स्नेह ही लगता था जबकि असलियत में उनके मन में कुछ और ही था। उम्र के हिसाब से उन दिनों विपरीत सेक्स, खासकर अपनी हम उम्र लड़कियों के प्रति मन में आकर्षन ज़रूर होता था और जिज्ञासा भी थी लेकिन मुझे चुदाई के बारे में जानकारी नहीं थी। फिल्मों में कोई उत्तेजक दृश्य देखकर मेरा लंड कभी-कभार अपने आप सख्त हो जाता था लेकिन मैंने तब तक मुठ मारना भी शुरू नहीं किया था।

रशीदा मैडम की उम्र पैंतीस साल के करीब थी और बेहद खूबसूरत और सैक्सी थीं। बड़ी-बड़ी आँखें, तीखे नयन-नक्श, सुडौल बदन, बिल्कुल सुपर मॉडल लगती थीं रशीदा मैडम। वो अपने अपियरन्स का भी काफी ध्यान रखती थीं। हमेशा नये फैशन के सलवार सूट और ऊँची हील के सैंडल पहनती थीं और चेहरे पर सौम्य मेक-अप करके टिपटॉप रहती थीं। लेकिन मेरे मन में कभी भी रशीदा मैडम के बारे में गलत विचार नहीं आया।

एक बार पापा को टूर पे जाना पड़ा तीन दिनों के लिये। वैसे ये कोई नयी बात नहीं थी और पापा जब भी टूर पर जाते थे तो हमारा नौकर मेरा पूरा ख्याल रखता था। लेकिन इस बार हमारे नौकर को तभी एक रात के लिये अपने भाई की शादी में भी ज़रूरी जाना था। रशीदा मैडम को पता चला तो उन्होंने पापा से कहा कि एक रात के लिये वो हमारे घर रुक जायेंगी। वैसे भी अगले दिन शनिवार था और छुट्टी थी।

पापा उस दिन दोपहर की फ्लाइट से चले गये। हमारे नौकर को भी रात आठ बजे के करीब निकलना था तो उसने सब डीनर वगैरह और रशीदा मैडम के लिये गेस्ट-बेडरूम वगैरह तैयार कर दिया उस दिन रशीदा मैडम ने मुझे स्कूल में बता दिया था कि वो छः बजे की बजाय सात बजे तक आयेंगी क्योंकि उन्हें किसी पार्टी में जाना था।

रशीदा मैडम करीब साढ़े-सात बजे एक छोटे बैग में कपड़े वगैरह लेकर आयीं। रशीदा मैडम आज कुछ ज्यादा ही अच्छे से तैयार होयी हुई थीं। उन्होंने आज आँखों पर आइ-शेडो और मस्कारा भी लगाया हुआ था और काफी अच्छा मेक-अप किया हुआ था। पार्टी के हिसाब से ही बेबी-पिंक कलर का सलवार- सूट पहना था जिसकी कमीज़ पर मोतियों और क्रिस्टल के साथ रेशमी धागे की सुंदर कढ़ाई की हुई थी। पैरों में काले रंग के काफी ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल थे। नौकर को अपने भाई की शादी में जाना था इसलिये रशिदा मैडम के आते ही उसने डिनर लगा दिया।

रशीदा मैडम बोली, “रितेश तुम खाना खा लो... मैं तो पार्टी में खा कर सीधे आ रही हूँ!”

मैं डिनर करने लगा और रशीदा मैडम भी डॉयनिंग टेबल पर मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गयीं। नौकर उनके लिये संतरे का जूस ले कर आया तो उन्होंने नौकर को भी उसी वक्त जाने को बोल दिया कि उसे कहीं देर ना हो जाये। वो अगले दिन दोपहर तक लौटने का आश्वासन देकर चला गया।

मैंने देखा कि रशीदा मैडम जूस पीते हुए बहुत अजीब नज़रों से ऐसे घूर रही थीं जैसे बिल्ली किसी चूहे को देख रही हो और उनके होंठों पर एक रहस्यमयी मुस्कान थी। इसके अलावा मैंने नोटिस किया कि उनकी आँखें भी थोड़ी लाल थीं और भारी सी लग रही थीं। मैंने पूछा , “मैडम आपकी आँखें लाल सी लग रही हैं... आपकी तबियत तो ठीक है ना

वो हंसते हुए बोली, “मैं ठीक हूँ रितेश... वो बस यहाँ आने से पहले पार्टी में थोड़ी ड्रिंक कर ली थी इसलिये... बट ऑय एम ऑल राइट!” मेरे कुछ बोलने के पहले ही वो फिर बोली, “कभी-कभार ड्रिंक कर लेती हूँ... लेकिन स्कूल में किसी से कहना नहीं... प्लीज़!”

मैंने उन्हें आश्वासन दिया कि मैं किसी से नहीं कहुँगा तो वो उठकर अपने बैग में से वोडका की बोतल निकाल लायीं और बोली, “स्कूटर चला कर यहाँ आना था इसलिये पार्टी में ठीक से पी नहीं सकी... जब तक तुम डिनर कर रहे हो मैं भी एक-दो ड्रिंक ले लेती हूँ!” फिर अपने जूस में ही वोडका मिला कर मेरे सामने बैठ कर पीने लगी। जब तक मैंने डिनर खतम किया, मैडम ने भी दो पैग पी लिये थे।

फिर हम स्टडी रूम में आ गये। रशीदा मैडम बोली, “रितेश, आज चलो मैं तुम्हें रिप्रोडक्शन सिस्टम पढ़ाती हूँ!” उनके बोलने के तरीके से लग रहा था कि वो नशे में थीं।

“लेकिन मैडम कल जो आपने स्केलेटल सिस्टम पढ़ाना शुरू किया था वो तो अभी काफी बाकी है!” मैंने कहा।

“रितेश! मैं कईं दिनों से तुम्हें रिप्रोडक्शन सिस्टम पढ़ाने के बारे में सोच रही थी...! रिप्रोडक्शन सिस्टम की नालिज होना ज़िंदगी में बेहद ज़रूरी है!” रशीदा मैडम मेरा गाल सहलाते हुए बोली।

मैंने कहा, “ओके मैडम!” और किताब निकालने लगा।

“रितेश! बुक की कोई ज़रूरत नहीं है... मैं तुम्हें बेहद सिंपल तरीके से प्रैक्टिकली रिप्रोडक्शन सिस्टम पढ़ाऊँगी... तुम्हें इतना इंट्रस्टिंग लगेगा कि हर रोज़ मुझसे रिप्रोडक्शन सिस्टम पढ़ाने को कहोगे!” वो मुस्कुराते हुए बोली।

फिर उन्होंने बतान शुरू किया, “रिप्रोडक्शन सिस्टम में मेल और फिमेल के रिप्रोडक्टिव पार्ट्स के बारे में पढ़ते हैं!”

“मैडम ये रिप्रोडक्टिव पार्ट्स क्या होते हैं

“रितेश रिप्रोडक्टिव पार्ट्स मतलब कि सेक्ज़ुअल ऑर्गन.. मैं तुम्हें आम ज़ुबान में बेहद आसान करके समझाती हूँ...! देखो जिस्म के निचले हिस्से में तुम्हारा रिप्रोडक्टिव पार्ट है और मेरे जिस्म के निचले हिस्से में मेरा रिप्रोडक्टिव पार्ट! लड़कों के रिप्रोडक्टिव पार्ट को आम ज़ुबान में लंड कहते हैं और लड़कियों के पार्ट को चूत कहते हैं। एक काम करो तुम खड़े हो जाओ... मैं तुम्हें दिखाती हूँ!”

मैं खड़ा हो गया। मैं उस दिन जींस पहने हुए था। रशीदा मैडम ने मेरी जींस के बटन को खोल दिया। फिर ज़िप्पर को नीचे किया और आखिर में जींस को नीचे गिरा दिया। मैं अंडरवीयर में था। वो बोली, “रितेश ये अंडरवीयर भी उतार दो!”

“वो... वो क्यों मैडम मैं शर्माते हुए बोला।

“रितेश तुम्हारा रिप्रोडक्टिव पार्ट इसी अंडरवीयर के अंदर है!”

“लेकिन मैडम वो तो मेरा पेनिस है जिससे मैं पेशाब करता हूँ!”

“हाँ वही... पेनिस को ही तो आम ज़ुबान में लंड कहते हैं और ये ही तुम्हारा रिप्रोडक्टिव पार्ट्स है! रितेश दिखाओ तो कैसा है!” रशिदा मैडम ज़ोर देते हुए बोली। उनकी साँसें तेज़ चल रही थीं।

मैं हिचकिचाया तो उन्होंने खुद ही मेरा अंडरवीयर नीचे खींच दिया। मैंने झट से अपने हाथों से अपना लंड छुपा लिया। मुझे बहुत शरम आ रही थी।

“देखो रितेश! ऐसे शर्माओगे तो कैसे सीखोगे... चलो हाथ हटाओ अपने...!” ये कहते हुए उन्होंने खुद ही मेरे हाथ मेरे लंड से दूर हटा दिये। मुझे बहुत अजीब लग रहा था और मैं नज़रें झुका कर खड़ा था।

“वाओ! रितेश तुम्हारा लंड तो बेहद गोरा और खूबसूरत है! देखो इसी को लंड कहते हैं!” रशीदा मैडम मेरे लंड को अपने नरम हाथ में पकड़ कर सहलाते हुए रोमांचित होकर बोली। उनके सहलाने से मेरे लंड में स्वतः ही सख्ती आने लगी। मेरे लंड को सहलाना ज़ारी रखते हुए रशीदा मैडम फिर बोली, “ये रिप्रोडक्शन सिस्टम का एक अहम हिस्सेदार है... देखो ये सख्त हो रहा है... इसका मतलब तुम्हारा लंड अब इस काबिल हो चुका है कि वो रिप्रोडक्शन सिस्टम का हिस्सा बन सके... पहले ये बताओ कि तुम सैक्स के बारे में क्या जानते हो... बच्चे कैसे होते हैं

“वो मैडम... बस इतना ही कि जब लड़का और लड़की साथ में नंगे सोते हैं और किस करते हैं तो लड़की प्रेगनेन्ट हो जाती है!” मैंने बताया जो भी मैं हिंदी फिल्मों की वजह से जानता था।

मेरी बात सुनकर रशीदा मैडम हंसने लगी और फिर बोली, “रितेश तुम भी कितने नादान हो... साथ में सिर्फ नंगे सोने से कुछ नहीं होता... ये लंड जब औरत की चूत के अंदर जाकर उसे चोदता है और थोड़ी देर चुदाई करने के बाद औरत की चूत में ये अपना क्रीम जैसा पानी गिरा देता है... उससे बच्चा पैदा होता है!”

“मैडम इसमें से तो पेशाब निकलता है...!”

“क्या तुम्हारे लंड से कभी क्रीम जैसा गाढ़ा सफेद पानी नहीं निकलारशीदा मैडम ने कातिलाना अंदाज़ में मुस्कुराते हुए पूछा।

“नहीं मैडम...!” मैंने कहा।

“रियली! कोई बात नहीं... मैं हूँ ना ये सब सिखाने के लिये... खैर अब मैं तुम्हें चूत के बारे में बताती हूँ... देखो इधर!” वो मुस्कुराते हुए बोली और फिर उन्होंने अपनी कमीज़ को ऊपर उठाकर अपनी सलवार की तरफ़ इशारा करते हुए आगे कहा, “इसके अंदर मेरी चूत है...!”

रशिदा मैडम ने अपनी सलवार का नाड़ा खोल दिया और एक ही झटके में सलवार अपनी कमर से अलग कर दी । मैडम की सलवार के नीचे लाल रंग की छोटी सी सिल्क की पैंटी थी। फिर वो बोली, “रितेश इधर आओ और अपना हाथ इस पैंटी के अंदर डाल कर चूत को ऊपर से फील करो!”

मैंने हाथ अंदर डाला तो गीला-गीला और बेहद गरम महसूस हुआ। मैंने तुरंत हाथ बाहर निकाल लिया और बोला, “मैडम इसके अंदर इतनी गर्मी है और गीला है... क्या आपने पेशाब कर दिया

रशीदा मैडम मेरी मासूम बातों पर हंसते हुए प्यार से बोली, “ओह नो! ये पेशाब नहीं... मेरी चूत का रस है। जब चूत चुदने के लिये मचलती है तो उसमें से ये खुशबूदार रस निकलता है... इसका ज़ायका भी मस्त होता है... वैसे ही जैसे लंड से निकलने वाली क्रीम का!”

फिर वो मेरा हाथ पकड़ कर अपनी नाक के पास ले गयीं और अदा से सूँघते हुए अपने मुँह में ले कर मेरी उंगलियाँ चूसने लगी। फिर रशीदा मैडम ने अपनी पैंटी को भी उतार दिया अब वो कमर से नीचे बिल्कुल नंगी थी। रशिदा मैडम बोली, “देखो रितेश! ये मेरी चूत है! इसके ऊपर काले रंग के बाल होते हैं जिन्हें झाँटें कहते हैं... लेकिन मैं उन्हें साफ़ कर देती हूँ क्योंकि मुझे साफ-सुथरी चिकनी चूत पसंद है! ये देखो... यहाँ गहरायी है ना!”

“येस मैडम!” मैं तो मंत्रमुग्ध था क्योंकि पहले कभी मैंने चूत नहीं देखी थी।

अपनी चूत को उंगलियों से फैलाते हुए रशीदा मैडम बोली, “देखो बिल्कुल नहर की तरह है... दोनों तरफ बाँध है और बीच में गहरायी... तो इसी को चूत कहते हैं! तुम्हारा लंड इसी चूत में जाकर चोदेगा तो उसे चुदाई कहेंगे!”

मैंने थोड़ा कन्फ्यूज़्ड होते हुए पूछा, “लेकिन मैडम लंड इस चूत में कैसे घुसेगा

रशीदा मैडम बोली, “चूत के अंदर घुसने और चुदाई करने के लिये लंड का सख्त होना ज़रूरी है... जब बहुत सारा खून लंड की नसों में भर कर दौड़ने लगता है तो लंड फूल कर सख्त हो जाता है!”

“लेकिन मैडम... लंड की नसों में खून कैसे दौड़ेगा मैंने ज्ञासापूर्वक पूछा।

रशीदा मैडम मेरे लंड को अपनी मुलायम मुठ्ठी में सहलाते हुए बोली, “जब चुदाई की मस्ती चढ़ती है तो खुद-ब-खुद लंड में खून दौड़ने लगता है... अब देखो मैं तुम्हारा लंड सहला रही हूँ तो ये धीरे-धीरे सख्त हो रहा है... और अगर मैं इसे अपने मुँह में ले कर चूसूँ तो तुम्हें और ज्यादा मस्ती चढ़ेगी और ये लंड बिल्कुल पत्थर की तरह सख्त हो जायेगा... चलो अब जल्दी से सारे कपड़े उतारो... मैं सब कुछ प्रैक्टिकल करके दिखाती हूँ!”

इस बार मैंने आनाकानी नहीं की और अपने सारे कपड़े उतार दिये। रशीदा मैडम भी अपने सारे कपड़े उतार कर बिल्कुल नंगी हो गयीं। अब उन्होंने सिर्फ ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल पहने हुए थे। मैं तो उनका नंग रूप देखता ही रह गया। मेरी चिकनी छाती पर हाथ फिराते हुए रशीदा मैडम अदा से मुस्कुरा कर बोलीं, “क्यों रितेश! कैसा लगा मेरा नंगा जिस्म

“मैडम आप बहुत सुंदर हैं... मैंने पहले कभी किसी को नंगा नहीं देखा... मुझे बहुत कुछ-कुछ अजीब सा महसूस हो रहा है... देखिये मेरा लंड भी और फूलने कगा है... और आपके ब्रेस्ट तो बहुत ही गज़ब के हैं!” मैंने उत्तेजित होकर कहा।

“देखा मैंने कहा था ना... मुझे नंगा देखकर तुम्हें चुदाई की मस्ती चढ़ रही है और तुम्हारा लंड खुद-ब-खुद इकसाइटिड हो रहा है!” रशीदा मैडम फिर बैठ गयीं और और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने सामने खड़ा कर लिया।

मैंने पूछा, “मैडम तो क्या अब मेरा लंड आपकी चूत में घुस कर चोद सकता है

“ज़रूर चोद सकता है... लेकिन रितेश! चुदाई महज़ चूत में लंड डाल कर चोदने का मकैनिकल प्रॉसेस नहीं है... बल्कि इसका पूरा-पूरा मज़ा लेना और देना चाहिये... खुदा ने दुनिया में चुदाई से बड़ा कोई मज़ा या खुशी नहीं बनायी... चुदाई के दौरान दिल, जिस्म और रूह एक हो जाते हैं और ज़न्नत के सुकून का एहसास होता है!” रशीदा मैडम गंभीर होते हुए बोली।

उन्होंने आगे कहा, “चुदाई से पहले एक दूसरे को खूब सहलाना... चूमना... चूसना चाहिये... इससे बहुत मस्ती चढ़ती है और चुदाई का लुत्फ कईं गुना हो जाता है... जैसे कि अगर तुम मेरे ब्रेस्ट... मतलब कि मम्मे दबाओगे और मेरे निप्पल चूसोगे तो मेरी भी मस्ती बढ़ेगी... और ये देखो... मेरी चूत के ऊपर ये छोटी सी लंड जैसी क्लिट है... अगर इसे सहलाया या रगड़ा जाये या मुँह से चूसा जाये तो चूत बेहद मस्त हो जाती है... इन सबको फोरप्ले कहते हैं!”

फिर रशीदा मैडम ने मेरी गर्दन पकड़ कर मेरा चेहरा अपने चेहरे के ऊपर झुका लिया और मेरे होंठ चूसने लगी। “रितेश! मेरे मम्मे सहलाओ... और मेरे निप्पल सक करो!” ये कहते हुए रशीदा मैडम ने मेरा चेहरा अपने ठोस मम्मों पर दबा दिया। मैं उनके मम्मे दबाते हुए बच्चे की तरह उनके निप्पल मुँह में लेकर चूसने लगा तो रशीदा मैडम की सिसकरियाँ निकलने लगी। “वेरी गुड रितेश! ऐसे ही चूसो...!” मेरे बालों में बेकरारी से हाथ फिराते हुए रशीदा मैडम बोलीं।

फिर थोड़ी देर में उन्होंने मुझे अपने सामने सीधा खड़ा कर दिया और मेरे लंड के सुपाड़े पर चुम्मा दे दिया। जैसे ही रशीदा मैडम मेरा लंड अपने मुँह में लेने लगी तो मैं पीछे हटते हुए बोला, “नहीं मैडम... गंदा है ये... इसमें से पेशाब निकलता है...!”

रशीदा मैडम ने मुझे फिर अपने सामने खींचते हुए कहा, “रितेश... लंड गंदा नहीं होता... इसे चूसने में तो मुझे बेहद मज़ा आता है और तुम्हें तो इतनी मस्ती चढ़ेगी कि तुम कंट्रोल नहीं कर पाओगे... मैं तो तुम्हारे लंड से निकलने वाली पहली-पहली क्रीम के ज़ायके के लिये बेकरार हूँ... ऐसा मौका ज़िंदगी में मुझे पहले कभी नसीब नहीं हुआ!”

इतना कह कर उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया और उसपे जीभ घुमा-घुमा कर चूसने लगीं। मेरा तो मस्ती में मेरा सिर घूमने लगा। इतना सुखद एहसास जीवन में पहले कभी नहीं हुआ था। थोड़ी देर में मेरा बदन ऐंठ कर काँपने लगा और मैंने रशीदा मैडम का सिर पकड़ कर रिरियाना शुरू कर दिया। मुझे लगा कि मेरा पेशाब निकलने वाला है। रशिदा मैडम को भी एहसास हो गया कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मेरा लंड अपने मुँह में ज़ोर-ज़ोर चूसते हुए उन्होंने मेरे चूतड़ पकड़ लिये ताकि मैं कहीं पीछे ना हट जाऊँ। कुछ ही क्षणों में मुझ अपने लंड में कुछ उबल कर दौड़ता सा महसूस हुआ था और मेरा लंड रशीदा मैडम के मुँह में स्खलित हो गया। आखिरी कतरा चूस लेने के बाद ही रशीदा मैडम ने मेरा लंड बाहर निकाला। मेरी आँखों के सामने तो अंधेरा ही छा गया था और मैं वहीं रशीदा मैडम के पैरों के पास फर्श पर बैठ गया। जीवन में मेरा लंड पहली बार स्खलित हुआ था और वो भी अपने से तीगुनी उम्र की टीचर के मुँह में।

रशिदा मैडम अपने होंठ चपचपाते हुए बोली, “थैंक यू रितेश! आज तुमने मुझे ज़िंदगी का सबसे बेशकीमती तोहफा दिया है... आज पहली बार किसी लंड की पहली-पहली क्रीम का ज़ायक़ा नसीब हुआ है... ऑल थैंक्स टू यू!”

“मैडम! मुझे भी बहुत अच्छा लगा... आऊट ऑफ दिस वर्ल्ड!” मैंने कहा।

रशीदा मैडम अपनी चूत पर हाथ फिराते हुए बोली, “जब मेरी चूत चोदोगे तो और भी मज़ा आयेगा!”

“लेकिन मैडम मेरा लंड तो अब नरम हो गया... चुदाई कैसे होगी मैंने निराशा भरे स्वर में कहा।

“अरे मायूस क्यों हो रहा है... अभी अपने प्यार से इसमें फिर जान फूँक दूँगी!” मेरे लंड को अपने सैंडल से टटोलते हुए रशीदा मैडम बोली। असल में उनके सैंडल के स्पर्श मात्र से भी मेरे लंड में मस्ती ट्रिगर होने लगी। उन्होंने फिर मुझे अपने सामने खड़ा किया और मेरा लंड पकड़ कर सहलाने लगी और एक बार फिर उसे मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया। मेरे लंड को सख्त होते देर नहीं लगी।

जब मेरा लंड लोहे के रॉड की तरह सख्त हो गया तो रशीदा मैडम बोली, “मैं पैरों को फैलाकर टेबल के बल खड़ी हो जाती हूँ, तुम अपना लंड मेरी चूत में डालो!”

“लेकिन मैडम... बच्चा पैदा हो गया तो... मैंने आशंकित होकर पूछा।

रशीदा मैडम बोली, “कोई बात नहीं... मैं टीचर हूँ ना... ऐसा नहीं होने दूँगी क्योंकि मैं बच्चा ना होने की दवाई लेती हूँ!”

मैंने फिर पूछा, “लेकिन मैडम मेरा तो लंड काफी सख्त और बड़ा है... ये आपकी चूत में कैसे घुसेगा... कहीं आपकी चूत ज़ख्मी ना हो जाये!”

“कुछ नहीं होगा... तुम्हारा लंड मेरे थूक से चिकना हुआ है और मेरी चूत भी चिकने रस से भिगी हुई है... जब तुम इसमें अपना लंड डालोगे तो अंदर चला जायेगा...!” रशीदा मैडम बेकरारी से मेरे सवालों पर थोड़ा खीझते हुए बोली। वो अपने दोनों पैरों को फ़ैला कर टेबल के बल चूतड़ टिका कर खड़ी हो गयीं। पैरों मे सिर्फ़ ऊँची हील के सैंडल पहने इस तरह चौड़ी टाँगें करके खड़ी वो बहुत मादक लग रही थीं। रशीदा मैडम ने खुद मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर रखा तो मैंने धीरे से धक्का दिया। मेरा लंड सरसराता हुआ रशीदा मैडम की चूत में चला गया।

“ओहहहह आआआहह... रितेश बहुत सख्त और गरम लंड है तुम्हारा... वेरी गुड... पूरा लंड घुसा दो!” रशीदा मैडम ने मस्ती में सिसकते हुए कहा। मैंने धीरे से और धक्का दिया तो पूरा का पूरा लंड रशीडा मैडम की चूत में चला गया। उनकी भीगी चूत इतनी गरम और इतनी मुलायम थी जैसे कि गरम मक्खन।

“ऊँऊँहहह्ह.... रितेश! अब अपने लंड को बाहर खींचकर फिर थोड़ा अंदर डालो!”

मैंने उनके निर्देश अनुसार अपने लंड को थोड़ा बाहर खींचा और फिर अंदर डाल दिया। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। रशीदा मैडम ने आँखें बंद कर लीं। वो भी अपने चूतड़ आगे-पीछे चलाने लगी।

वो मेरी गर्दन में बाँहें डालकर बोली, “रितेश इसे ही चोदना कहते हैं... जब चूत में लंड आगे-पीछे होता है... तो देखो चूत से रस निकलता है और चुदाई आसान हो जाती है... चोदो... और अंदर डालो... थोड़ा और अंदर दबाओ... आहहह बेहद अच्छी तरह चुदाई कर रहे हो तुम... थोड़ा राइट से मारो... थोड़ा राइट... और थोड़ा... हाँऽऽ हाँऽऽ चोदो... चूत के अन्दर और थोड़ा डालो। ऊँऊँमऽऽऽ. रितेश वेरी गूड... मैं जानती थी कि तुम्हारा लंड वाकय चोदने के काबिल हो गया है. पेलो इसे और पेलो... आज तुम्हारे लंड का इनॉग्यरैशन करके मैंने तुम्हें जवान बना दिया!”

मुझे भी मज़ा आ रहा था। लंड वाकय में बहुत कड़क हो गया था। शरीर में एक अजीब सी कसावट पैदा हो गयी थी और ना जाने क्या हो गया। फिर रशीदा मैडम बोली, “रितेश रुको... थोड़ा बाहर निकालो अपने लंड को... मैं कुत्तिया बन जाती हूँ... तुम पीछे से पेलो....!”

रशीदा मैडम अपने दोनों हाथों को ज़मीन के बल रखके कुत्तिया बन गयीं। मैंने अपना लंड पीछे से उनकी चूत में लगाया और पेलना शुरू कर दिया। “हाँ रितेश...! आह बड़ा मज़ा आ रहा है... चोदो और चोदो... !” वो लगातार सिसकते मस्ती में बड़बड़ा रही थीं, “हाँऽऽ फाड़ डालो मेरी चूत... पूरी तरह चोद दो आज.... मेरी चूत बेहद प्यासी है... आहह... ऊऊऊहहहह बहुत दिनों के बाद ऐसा ताज़ा लंड नसीब हुआ है... कोरे लंड से चुदाने का मज़ा ही अलग है... चोद... और ज़ोर से... तुम वाकय में मेरे प्यारे स्टूडेंट हो... कब से मेरी नज़र थी तुम पर... अपनी मैडम की चूत की प्यास बुझा दो!”

“मैडम... आप जैसे कहेंगी वैसे ही चोदुँगा मैं आपकी चूत को... इसका कचूमर निकाल दूँगा.. मैडम... बहुत अच्छा लग रहा है!” मैंने उनकी चूत में लंड पेलते हुए कहा।

“भोंसड़ा बना डालो अपनी मैडम की चूत का... चोदो... पेलो... और जोर से... हाँऽऽऽ रितेश... ऐसे ही... पेलते रहो... पेलते रहो... अपने लंड को मेरी चुत में पेलते रहो....!” रशीदा मैडम इसी तरह बोलती रहीं और ये चुदाई करीब पंद्रह मिनट तक ज़ारी रही। इस बीच मैडम का बदन दो बार अकड़ा और चींखते हुए मेरे लंड पर पानी छोड़ते हुए झड़ीं। फिर मेरा लंड भी रशीदा मैडम की चूत में स्खलित हो गया और मैं उनकी कमर के ऊपर ही ढेर हो गया।

अपनी साँसें संभालने के बाद उन्होंने मेरे लंड को प्यार से अपने मुँह में चूस कर साफ किया और फिर हम नंगे ही गेस्ट-बेडरूम में आकर बेड पर लेट गये। रशीदा मैदम ने अपने सैंडल भी नहीं निकाले। वो मेरा गाल सहलाते हुए बोली, “रितेश... तो समझ में आया रिप्रोडक्शन सिस्टम

“येस मैडम... और मज़ा भी आया!” मैंने कहा।

रशीदा मैडम बोलीं, “रितेश... ये तो रिप्रोडक्शन सिस्टम का पहला ही चैपटर था। अभी तो बहुत कुछ सीखना बाकी है और मुझे जब भी मौका मिलेगा तुम्हें सब कुछ प्रैक्टिकली सिखाऊँगी और हम खूब प्रैक्टिस करेंगे! बस प्रॉमिस करो कि किसी से भी इस बारे में ज़िक्र नहीं करोगे!”

“श्योर मैडम... मैं सीक्रेट रखुँगा ये सब...! आप बहुत अच्छी टीचर हैं...! कितनी मस्ती और मज़े से आपने प्रैक्टिकली मुझे रिप्रोडक्शन सिस्टम समझा दिया!” मैं बोला।

“रितेश मुझे चुदवाने का बेहद शौक है... खासतौर पे तुम्हारे जैसे वर्जिन और यंग लड़कों से... मैं कईं लड़कों को रिप्रोडक्शन सिस्टम प्रैक्टिकली समझा कर उन्हें चुदाई में एक्सपर्ट बना चुकी हूँ!” कहते हुए उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में दबोच लिया और मेरा चेहरा उनके नंगे मम्मों में धंस गया। ऐसे ही लिपट कर लेटे हुए कब हमें नींद आ गयी पता ही नहीं चला।

अगले दिन सुबह मेरी आँख खुली तो रशीदा मैडम लेटी हुई मेरा लंड प्यार से सहला रही थीं जो इस वक्त काफी सख्त हो चुका था। मैंने देखा कि रशीदा मैडम अभी भी मेरी तरह ही बिल्कुल नंगी थीं और अपने हील वाले सैंडल भी नहीं उतारे थे। मुझे जागते देख कर उन्होंने मेरे होंठ चूम लिये और बोली, “तुम्हारा लंड तो कब से उठा हुआ है... बस तुम्हारे उठने का इंतज़ार था! दोपहर तक तुम्हें चुदाई के और एक-दो कॉन्सेप्ट सिखा दुँगी तुम्हें!”

उसके बाद नौकर के आने के पहले दोपहर तक मैंने और रशीदा मैडम ने दो बार चुदाई की और उन्होंने मुझे चूत चाटना भी सिखाया। नौकर के आने से पहले हम दोनों तैयार हो गये और बाद में रशीदा मैडम अपने घर चली गयी।

हमारे घर पर शाम को ट्यूशन के समय चुदाई का प्रैक्टीकल करने में खतरा था इसलिये रशीदा मैडम ने पापा से बात कर ली की मैं ही रशीदा मैडम के घर जाकर उनसे ट्यूशन पढ़ूँ। मैं हफ्ते में तीन दिन शाम को रशीदा मैडम के घर जाने लगा पढ़ने के लिये। कहने की ज़रूरत नहीं कि वास्तविक पढ़ायी कम होती थी और चुदाई की प्रक्टिस ज्यादा। रशीदा मैडम मुझसे अक्सर गाँड भी मरवाती थीं और वी-सी-आर पे ब्लू-फिल्में दिखा कर वैसे ही चुदाई मेरे साथ करतीं।

फिर करीब तीन महीने पश्चात मुझे उन्होंने अपनी दो और सहेलियों की हवस का शिकार भी बना दिया। रशीदा मैडम की वो दोनों सहेलियाँ, सायरा आंटी और आमना आंटी, भी उन ही की तरह यंग कमसिन लड़कों की रसिया थीं। हफ्ते भर शाम को ट्यूशन में रशीदा मैडम मुझे चुदाई के गुर सिखा कर खूब प्रैक्टिस करवाती और फिर हर शनिवार को रशीदा मैडम के घर पे ही उनकी दोनों सहेलियाँ इक्स्टर्नल इग्ज़ैमिनर बन कर आतीं और शराब पी कर तीनों ठरकी सहेलियाँ मिलकर दो-तीन घंटे तक मेरी प्रैक्टीकल की परीक्षा लेतीं। सायरा आंटी रशीदा मैडम की तरह ही किसी दूसरे स्कूल में टीचर थीं और आमना आंटी हाऊज़-वाइफ थीं और उनके हसबैंड बहुत बड़े उद्योगपति थे। तीनों में से आमना आंटी ही सबसे ज्यादा ठरकी और सबसे ज्यादा पर्वर्ट भी थीं। चुदाई के समय तो बेकाबू होकर बिल्कुल भूखी शेरनी की तरह खौफनाक हो जाती थी और काटने, खरोंचने तक लगती थी। शराब के नशे में इतनी गंदी-गंदी गालियाँ बकती थीं कि किसी रंडी को भी शरम आ जाये।

ये सब सिलसिला करीब दो साल तक चला और नवीं क्लास में पापा ने मुझे बॉर्डिंग स्कूल में भेज दिया।

!!! समाप्त !!!


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