तरक्की का सफर

लेखक: राज अग्रवाल


भाग-१४


एम-डी के जाने के बाद प्रीती ने देखा कि लड़कों का लंड फिर खड़ा हो चुका है। लड़कों लगता है कि तुम लोगों की भूख अभी शाँत नहीं हुई है, शायद और चुदाई करना चाहते हो? तुम लड़कियों को अपने साथ कमरे में ले जाओ और चाहे जैसी चुदाई करो..... लेकिन ये ध्यान रखना कि लेट काफी हो चुका है और हमें खाना भी खाना है, प्रीती ने कहा।

उनके जाने के बाद प्रीती ने टीना से कहा, टीना! अब तुम्हारा अगला सबक चुदाई के मज़े कैसे लिये जाते हैं..... रजनी! क्या तुम पहले अपनी चूत चूसवाना चाहोगी?

नहीं प्रीती! तुम्हारा हक पहले बनता है.... मैं बाद में चूसवा लूँगी, रजनी ने अपने लिये नया पैग बनाते हुए जवाब दिया।

ठीक है! अगर तुम यही चाहती हो तो! प्रीती बिस्तर पर थोड़ा आराम से लेट गयी और अपनी दोनों टाँगें एक दम फैला दी, टीना! अब तुम मेरी चूत तब तक चूसो और चाटो जब तक कि ये पानी ना छोड़ दे और एक-एक बूँद इसकी पी जाना।

टीना शर्मा भी रही थी और झिझक भी रही थी कि कैसे करूँ। अरे चलो चूसो! शरमाओ मत, तुम जानना चाहती थी ना कि तुम्हारी माँ और आँटी साथ-साथ क्या करेंगे, अब आया समझ में?

टीना झिझकते हुए अपनी ज़ुबान प्रीती की चूत पर घुमा कर उसे चाटने लगी, हाँ! सही जा रही हो, आधे मन से मत करो, दिल लगा कर चाटो और चूसो..... तुम्हें खूब मज़ा आयेगा, प्रीती ने उसके सिर पर हाथ रख कर उसे अपनी चूत पर और दबा दिया।

टीना अब थोड़ा और अच्छी तरह चाटने लगी। क्या अब मैं ठीक कर रही हूँ दीदी?

हाँ! अब सही कर रही हो। अब ऐसा करो अपनी अंगुलियों से प्रीती की चूत को फ़ैलाओ और अपनी जीभ से इसे अंदर से चाटो, रजनी ने उसे सिखाया।

रजनी ने जैसा कहा, टीना वैसा ही करने लगी। हाँ! अब अच्छा लग रहा है, तुम सही कर रही हो टीना, प्रीती सिसकी। प्रीती के एक हाथ में सिगरेट थी और टीना से चूत चुसवाते हुए बीच-बीच में कश ले रही थी। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

टीना! क्या तुम्हें चूत के अंदर चूत का दाना दिख रहा है? रजनी ने पूछा। टीना ने हाँ में गर्दन हिला दी।

तो उस पर अपनी जीभ घुमाओ और जैसे अँगुली से अपनी चूत को चोदती हो वैसे ही अपनी जीभ से अब प्रीती की चूत को चोदो, रजनी ने अपने पैग में से सिप लेते हुए कहा।

टीना अब अपनी जीभ जोर-जोर से प्रीती कि चूत में अंदर बाहर करने लगी। ओहहहहह टीना...आआआ मज़ा आ रहा है!!!!! तुम्हारी जीभ का जवाब नहीं, प्रीती अब मस्त हो कर बोल रही थी।

हाँ! अब इसकी चूत की पंखुड़ी को अपने दाँतों से काटो, पर जोर से नहीं? रजनी ने आगे सिखाया।

जैसे-जैसे रजनी सिखाती गयी वैसे-वैसे टीना करती गयी। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

हाँ आआआआआ.... जोर से अपनी जीभ डालो, ओहहहहह आआआआहहहह हाँआआआ मेरा छूटने वाला है, प्रीती जोर से चींखी।

टीना बहुत अच्छे! अब प्रीती की चूत का सारा पानी पी जाओ? रजनी ने अपना पैग खत्म करते हुए कहा।

टीना! तुम कमाल की हो, कहकर प्रीती ने उसे बाँहों में भर लिया और चूमने लगी।

अब किसकी बारी है? टीना ने अपनी जीभ बाहर निकालते हुए कहा।

आओ रजनी! अब तुम बिस्तर पर लेट जाओ! प्रीती ने रजनी के लिये जगह बनाते हुए कहा।

कुछ देर बाद जब टीना, रजनी और बाकी सब लड़कियों की चूत चाट चुकी थी तो थक कर बोली, बस अब और नहीं!!! मेरी जीभ दुखने लगी है।

तुम अब अपनी जीभ को आराम दो, अब हमारी बारी है कि हम तुम्हारी चूत को अपनी जीभ से मज़ा दें, प्रीती हँसते हुए बोली, इधर आओ और बिस्तर पर लेट कर अपनी टाँगें फैला दो जैसे मैंने फ़ैलायी थी।

आओ लड़कियों!!! अब हम टीना को ज़िंदगी का असली मज़ा दें, इतना कहकर प्रीती ने अपनी सिगरेट को ऐशट्रे में बुझाते हुए अपना मुँह टीना कि जाँघों के बीच छुपा दिया।

ऊऊऊऊओओओहहहह प्रीती!!!! टीना सिसकी।

प्रीती अब टीना की चूत को अपनी जीभ घुमा-घुमा कर चाट रही थी और उसे चूस रही थी। ओहहहहह प्रीती!!!! बहुत अच्छा लग रहा है..... हाँआआआआ चाटते जाओ..... हाँआआआआ ऐसे ही..... काट लो मेरी चूत को...... ओहहहह हे भगवान!!!! मैं तो गयीईईई, कहते हुए टीना की चूत झड़ गयी और वो गहरी-गहरी साँसें लेने लग गयी।

प्रीती मज़े लेकर उसकी चूत से निकली एक एक बूँद को पीने लगी। जैसे ही प्रीती हटी, रजनी उसकी जगह लेकर टीना की चूत को चूसने लगी। इस तरह बारी-बारी सब लड़कियों ने टीना की चूत को चाटा और चूसा।

मुझे नहीं मालूम कि मैं कितनी बार झड़ी हूँ, मुझे तो लग रहा है कि मेरे शरीर में जान ही नहीं है... टीना बोली।

मैं समझ सकती हूँ, इसलिये मेरे पास एक दवाई है! अब तुम्हें गाढ़े और मजबूत रस की जरूरत है जो तुम्हें लड़कों के लंड से ही मिलेगा, प्रीती ने कहा।

ठीक है! तो पहले तुम राज के लंड को चूसो और उसके पानी को पी जाओ और फिर हर लड़के के लंड का पानी पीना है... रजनी बोली।

टीना मेरी जाँघों के बीच आकर मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। हाँ ऐसे ही.... हाँ...आआ अपना मुँह ऊपर-नीचे करो, देखना कहीं दाँत ना लगा देना, मैं उसके सिर को अपने लंड पर दबाते हुए बोला, ओहहहहह हाँ...आआआ जोर से...... ओहहहहह हाँ...आआआ मेरा तो छूटाआआआ, कहते हुए मेरे लंड ने उसके मुँह में पिचकारी छोड़ दी। टीना ने सारा पानी पी कर मुँह बनाया।

क्यों अच्छा नहीं लगा क्या? रजनी ने पूछा। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

अच्छा था लेकिन थोड़ा नमकीन था, टीना ने जवाब दिया।

जब टीना सभी लड़कों का लंड चूस कर उनका पानी पी चुकी थी तो रजनी बोली, टीना! काफी देर हो चुकी है, चलो घर चलना है।

रजनी इतने नशे में थी कि उसके लिये ड्राईव करना तो मुमकिन ही नहीं था। टीना ने अपने कपड़े पहने और मैंने रजनी को बड़ी मुश्किल से किसी तरह उसके कपड़े पहनाये और फिर उसे सहारा देकर नीचे टैक्सी तक छोड़ने गया। मैं जब रजनी और टीना को टैक्सी में बिठा कर वापस आया तो देखता हूँ कि सिमरन और साक्षी मुँह बनाये सोफ़े पर पसरी हुई थीं।

तुम दोनों का मुँह उतरा हुआ क्यों है, क्या हुआ? मैंने पूछा।

देखो ना! प्रीती दीदी जय और विजय के साथ हैं, और अंजू-मंजू राम और श्याम को अपने साथ ले गयी हैं, सिर्फ़ हमारा ही खयाल रखने वाला कोई नहीं है। सिमरन थोड़ा मुँह बनते हुए बोली। उसके स्वर से साफ ज़ाहिर था कि उसने भी बहुत शराब पी ली थी।

अरे तुम दोनों ऐसा क्यों सोचती हो.....? मैं हूँ ना तुम दोनों का खयाल रखने के लिये, कहकर मैंने दोनों को अपनी बाँहों में भर लिया।

सारी रात मैं दोनों को चोदता रहा, और आखिर में थक कर हम सब सो गये।

अगला दिन और हफ्ता मेरा काफी बिज़ी गया। टाईम ही नहीं मिला काम से कि मैं किसी और चीज़ की ओर ध्यान दे सकूँ। एक रात जब मैं और प्रीती बिस्तर में थे तो प्रीती ने कहा, राज मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ।

हाँ! कहो क्या बात है? मैंने कहा।

आज दोपहर में जब मैं सुस्ता रही थी तो विजय मेरे कमरे में आकर मेरे बिस्तर में घुस गया।

तो इसमें हैरानी की बात क्या है, तुम उससे कितनी ही बार चुदवा चुकी हो? मैंने कहा।

हैरानी की बात नहीं.... मुझे दो बार चोदने के बाद वो पूछता है कि भाभी मर्द अपनी ज़िंदगी में सबसे ज्यादा खुश कब होता है? मैंने उससे कहा कि तुम मर्द हो तुम बताओ? वो बोला कि, भाभी! मैंने कॉलेज के दिनों में कई लड़कियों को चोदा, हमें इतना वक्त नहीं मिलता था कि हम बराबर चुदाई कर सकें पर फिर भी मैं सोचता था कि मुझसे खुशनसीब इंसान नहीं है।

फिर मेरी शादी मंजू से हो गयी, वो खुद इतनी चुदक्कड़ थी कि उसने मुझे कभी ना नहीं किया, फिर अंजू ने मुझे बहकाया और मैंने उसे चोदा। पता लगा कि जय भी मंजू को चोदता है। अब मेरे पास दो चूत थी चोदने के लिये।

प्रीती अपनी बात ज़ारी रखते हुए बोली, मैंने उससे पूछा कि मैं अभी तक समझी नहीं कि तुम कहना क्या चाहते हो? तो उसने जवाब दिया कि मैं छुट्टियों में यहाँ आना नहीं चाहता था लेकिन ये लोग मुझे जबरदस्ती ले आये। यहाँ आने के बाद मैंने देखा कि मैं सात नयी चूत चोद चुका हूँ और उसमे आप भी शमिल हैं, क्या आपको लगता है कि मैं खुश हूँ? विजय ने अपनी बात पूरी की।

मैंने उससे कहा कि इतनी छोटी सी उम्र में तुम इतनी चूतों को चोद चुके हो.... ये अपने आप में एक मिसाल है, तो विजय बोला कि नहीं भाभी, मैं खुश नहीं हूँ, आपको पता है ना कि - दिल मांगे मोर विजय ने हँसते हुए कहा।

मैंने पूछा कि इसका मतलब तुम और नये चूतों दो चोदना चाहते हो? तो वो अपने लौड़े को दबाते हुए बोला कि, हाँ भाभी! मैं जितनी नयी चूत को चोदता हूँ मुझे उतनी ही और चाहत होने लगती है। मुझे नयी चूत चोदने में मज़ा आता है, काश राज भैया नयी चूत का इंतज़ाम कर देते।

मैंने कहा कि अगर ऐसी बात है तो तुम राज को क्यों नहीं कहते? विजय बोला कि मैंने सोचा कि अगर आप उनसे बात करें तो बेहतर होगा।

मैंने फिर उसके लंड को दबाते हुए कहा कि, ठीक है मैं उससे बात करूँगी, लेकिन जब तक वो तुम्हारे लिये नयी चूत का इंतज़ाम करें तब तक तुम मेरी चूत की धुनाई कर दो।

प्रीती हँसते हुए मुझसे बोली, राज! सही में उसने मुझे इस तरह चोदा कि मेरी चूत भी पनाह माँग गयी।

तो तुम चाहती हो कि मैं उनके लिये चूतों का इंतज़ाम ऑफिस से करूँ? मैंने कहा।

हाँ राज! फ़िर से एक बार सामुहिक चुदाई का इंतज़ाम करो ना जैसे हमने टीना के जन्मदिन पर किया था, प्रीती मेरे लंड से खेलते हुए बोली, मैंने इतना वादा जरूर उससे किया है।

ठीक है जब तुमने कह दिया तो मुझे करना ही पड़ेगा, मैंने जवाब दिया।

दूसरे दिन ऑफिस में पहुँच कर मैंने आयेशा को पार्टी में आने की दावत दी तो वो बोली, सर, मैं खुशी से शामिल होती मगर लगता है मैं नहीं आ पाऊँगी।

क्यों क्या बात है? मैंने पूछा। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

सर, मेरे अब्बू शायद नहीं आने देंगे, उन्हें मेरी बहुत चिंता रहती है, आयेशा ने कहा।

तुम इसकी चिंता मत करो, तुम्हारे अब्बा से मैं बात कर लूँगा।

तो ठीक है सर, मैं आ जाऊँगी, आयेशा ये कहकर चली गयी।

मैंने आयेशा के अब्बू से बात कर उन्हें मना लिया।

शाम को प्रीती ने मुझसे पूछा कि पार्टी कौन से दिन रख रहा हूँ तो मैंने कहा कि, शनिवार को! मैंने रजनी से कह दिया है कि वो टीना को साथ ले आये और मैंने एम-डी को भी दावत दे दी है। हमारी नयी साथी आयेशा होगी।

शनिवार को मैंने आयेशा के अब्बू से इजाज़त लेकर आयेशा को उसके घर से पिक किया। आज तो बहुत सुंदर दिख रही हो..... क्या बात है..... कहीं कहर बरसाने का इरादा है, मैंने आयेशा दो देखते हुए कहा।

नहीं सर! ऐसा कुछ नहीं है, बस अपने बदन पर थोड़ा पर्फ्यूम छिड़का है और ये ड्रेस अपनी सहेली से उधार ली है ताकि मैं पार्टी में तमाशा ना बन जाऊँ, आयेशा ने जवाब दिया।

पर ये ड्रेस ज्यादा देर तक तुम्हारे बदन पे नहीं रहेगी।

क्यों सर? क्या पार्टी में चुदाई भी होगी? उसने पूछा।

हाँ... थोड़ी नहीं, बहुत सारी होगी, मैंने कहा।

फिर तो मज़ा आ जायेगा सर, ये कहकर वो मुझसे चिपट गयी।

मैंने भी उसे अपने नज़दीक कर लिया और उसकी चूचियाँ मसलने लगा। मैं बीच-बीच में उसके निप्पल भींच देता था तो उसके मुँह से जोर से सिसकरी निकल पड़ती थी।

सर, आपने तो मुझे अभी से गीला कर दिया, मैं अपनी सहेली को कपड़े पर लगे दाग के बारे में क्या बताऊँगी?

तुम समझदार हो! कोई ना कोई बहाना ढूँढ ही लोगी, कहकर मैं उसकी चूत को रगड़ने लगा।

जब तक हम घर पहुँचे आयेशा एक बार झड़ चुकी थी। जब हम घर में दाखिल हुए तो आयेशा को देख कर एक दम सन्नाटा छा गया। आयेशा ने जब रजनी और टीना को वहाँ देखा तो चौंक पड़ी, सर! मिस रजनी और मिस टीना ऐसी पार्टी में यहाँ क्या कर रही हैं?

डरो मत! ये हम में से ही एक है, और इनकी चूत मैंने ही फाड़ी थी, मैंने आयेशा को बाँहों में भरते हुए कहा।

नसीब वाली हैं ये कि आपने इनकी चूत फाड़ी, कहकर वो मुझसे चिपक कर खड़ी हो गयी।

दोस्तों!!! ये आयेशा है! मैंने उसका परिचय कराते हुए कहा।

इस परी को तो सबसे पहले मैं ही चोदूँगा, विजय अपने लंड को सहलाते हुए बोला। आयेशा सिर्फ़ मुस्करा के रह गयी।

आयेशा! मेरी बाँहों में आ जाओ, हमें समय नहीं गंवाना चाहिये, विजय अपनी बाँहें फैला कर बोला।

आयेशा अपना पर्स वहीं ज़मीन पर गिरा दौड़ के उसकी बाँहों में समा गयी।

आयेशा को विजय के पास जाते देख मैं रजनी और टीना के पास गया, अच्छा हुआ रजनी! तुम लोग आ गये।

हम आ तो गये पर तुम्हें नहीं मालूम जब अंकल यहाँ पहुँचे और टीना को यहाँ देखा तो हंगामा हो गया, रजनी बोली।

ऐसा क्या हुआ.... मुझे बताओ? इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

अपने पापा को यहाँ देख टीना भी चौंक गयी, और जब अंकल जोर से इस पर चिल्लाये कि वो यहाँ क्या कर रही है तो एक बार मैं भी घबरा गयी, पर टीना ने शांती से उन्हें कहा कि वही... पापा जो आप कर रहे हैं, आप यहाँ चोदने आये हैं और हम चुदवाने।

आओ देखता हूँ कि तुमने सही जवाब दिया कि नहीं, मैंने टीना को अपनी बाँहों में भरते हुए कहा।

सामुहिक चुदाई का दौर शुरू हो चुका था। चारों तरफ गर्मी का माहोल था, जिसके मन में जो आये वो उसे चोद रहा था। सब पर शराब और चुदाई का नशा सवार था और चुदाई का शुमार पूरे जोर पर था। पार्टनर्स बदले जा रहे थे, पूरे घर में सिसकियों और गहरी सांसों के अलावा और कोई आवाज़ नहीं थी।

रात बारह बजे जब सब थक गये तो मैंने आयेशा को उसके घर छोड़ा और घर आकर प्रीती की बाँहों में सो गया।

दूसरे दिन मैं ऑफिस पहुँचा तो देखा आयेशा वक्त से पहले ही आ गयी थी। मेरे आते ही उसने सब रिपोट्‌र्स और एक एपलीकेशन मेरी टेबल पर रख दी।

ये एपलीकेशन किस चीज़ की है? मैंने पूछा।

सर, आज मुझे आधे दिन कि छुट्टी चाहिये, जो काम पेंडिंग रह जायेगा वो मैं कल जल्दी आकर पूरा कर दूँगी, आयेशा ने कहा।

उसके चेहरे को देख कर मुझे लगा कि वो मुझसे कुछ छुपा रही है। आयेशा! सच-सच बताओ कि बात क्या है, तुम आधे दिन कि छुट्टी क्यों लेना चाहती हो?

सर, विजय का फोन आया था और वो चाहता है कि मैं दोपहर में वहाँ आऊँ। वो सब मुझे साथ में चोदना चाहते हैं। सर, कोई बहाना बना दीजिये ना! वो हँसते हुए बोली।

लेकिन घर में दूसरी औरतें भी तो हैं.... उनका क्या? मैंने पूछा।

सर! विजय ने बताया कि वो सब शॉपिंग पर जा रही हैं, और सर आप ही सोचिये कि जब चार खड़े लंड मेरे साथ होंगे, सर, सिर्फ़ इस खयाल से ही मेरी चूत से पानी टपक रहा है, सर, प्लीज़ मेरी छुट्टी मंज़ूर कर दीजिये, आयेशा गिड़गिड़ाते हुए बोली।

ठीक है! लेकिन एक शर्त पर कि तुम पेंडिंग काम कल पूरा कर दोगी, मैंने हँसते हुए कहा।

मेरा इतना कहने की देर थी कि आयेशा ने जोर से मेरे होंठों पर चुंबन लिया और केबिन के बाहर दौड़ कर चली गयी।

इसके पहले कि मैं आयेशा के चुंबन के असर से बाहर आता एम-डी का इंटरकॉम पर फोन आया, राज! आज आयेशा कहाँ है..... दिखी नहीं?

सर! आज वो छुट्टी पर है, मैंने जवाब दिया।

एम-डी ने मुझे अपने केबिन में बुलाया और नसरीन को कॉफी लाने को कहा। कॉफी की घूँट भरते हुए एम-डी ने कहा, राज! लगता है आयेशा पर काम का बोझ कुछ ज्यादा ही है, इसलिये मैं नसरीन को अपनी पर्सनल सेक्रेटरी बनाना चाहता हूँ।

सर, आपका खयाल तो अच्छा है, लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि उसे नियुक्त करने से पहले हमें उसकी काबिलियत को जान लेना चाहिये..... मैंने थोड़ा हँसते हुए कहा।

हाँ! तुम सही कह रहे हो! एम-डी ने जोर से हँसते हुए कहा।

एम-डी ने नसरीन को अपने केबिन में बुलकर कहा, नसरीन मैंने फैसला किया है कि मैं तुम्हें अपना पर्सनल सेक्रेटरी एपॉयंट कर दूँ.... लेकिन उसके पहले राज ने बताया कि हम तुम्हारी काबिलियत जाँच लें।

सर, मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है। नसरीन ने अपने ब्लाऊज़ के बटन खोलते हुए कहा। मैं आयेशा के ख्यालों में खोया हुआ था कि वो चार मुस्टंडे लंडों के साथ क्या कर रही होगी। इतने में मैंने देखा कि नसरीन बिल्कुल नंगी हो चुकी थी और इस समय हमेशा की तरह चुदने के पहले कोकेन की डोज़ अपनी नाक में खींच रही थी। फिर दो बार नसरीन की काबिलियत जाँचने के बाद मैंने एम-डी से जाने की विदा माँगी।

तुम जा सकते हो..... यहाँ सब ठीक है, ओहहहहह नसरीन! हाँ जोर से चूसो......., हाँआआआआ अब ठीक है!!!! ओहहहहह मेरा छूटने वाला है!!!! एम-डी कामुक्ता भरे स्वर में कह रहा था।

जब मैं घर पहुँचा तो देखता हूँ कि तीन लड़के अपने मुर्झाये लंड को हाथ में पकड़े बैठे थे। आयेशा कहाँ है और उसका क्या हाल है?

आयेशा तो सही कमाल की है, जब से आयी अपनी टाँगें पसारे चुदवा रही है, हमारे ही लंड में अब ताकत नहीं रही, विजय बोला।

जय कहाँ है? मैंने पूछा। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

जय इस समय आयेशा की चुदाई कर रहा है, पर हमें नहीं लगता कि इस बार झड़ने के बाद वो दोबारा उसे चोद सकेगा, राम ने कहा।

राज, तुम ही अब जा कर आयेशा को चोदो! श्याम ने कहा।

मैंने बेडरूम में झाँक कर देखा कि विजय धीरे-धीरे आयेशा की चुदाई कर रहा है। हाँ चोदो मुझे!!!!! ओहहहहह हाँआआआआआ आआआआहहहह मेरा छूटने वाला है, आयेशा सिसकरियाँ ले रही थी। उसका स्वर शराब के नशे के कारण भारी और अस्पष्ट सा था। विजय भी दो तीन धक्के और मार कर उसकी चूत में झड़ गया।

जैसे ही विजय उससे अलग हुआ, मैंने अपने कपड़े उतार कर अपना लंड आयेशा की चूत में डाल दिया, ओह सर!!! आप कब आये।

कोई जवाब दिये बिना मैं जमकर उसकी चुदाई करने लगा। जब मैंने भी अपना वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया और उससे अलग होने लगा तो वो मुझे बाँहों में जकड़ते हुए हकलाते हुए स्वर में बोली, स....सर! प्लीज़ एक... एक बार और.... चो...चोदो ना।

नहीं अब और नहीं.... तुम्हें घर जाना है.... और तुमने इतनी शराब क्यों पी? मैंने बिस्तर पर से उठते हुए कहा।

सर.... आप..आपने सारा मज़... किरकिरा कर...कर दिया, उसने उठते हुए कहा।

मैंने मज़ा किरकिरा नहीं किया.... बल्कि तुम्हें तुम्हारे अब्बू से बचा रहा हूँ, अगर तुम्हें ढूँढते हुए वो ऑफिस पहुँच गये और पता चला कि तुम दोपहर में ही चली गयी हो तो तुम्हारी शामत आ जायेगी।

हाँ सर... ये.... ये बात तो सही है, आयेशा बोली। फिर मैंने उसके परों में से उसके ऊँची हील के सैंडल निकाल कर उसे बाथरूम में शॉवर के नीचे बिठा दिया ताकि उसका नशा कुछ कम हो। नहाने के बाद उसने आधा घंटा आराम किया और फिर अपने कपड़े पहन कर जाते हुए चारों लड़कों से बोली, सही में तुम लोगों के साथ बहुत मज़ा आया..... ऐसा ही कार्यक्रम दोबारा फ़िर रखेंगे।

हाँ जरूर! चारों ने साथ में कहा।

अब अक्सर आयेशा दिन में छुट्टी ले मेरे फ्लैट पर चली जाती और चारों लड़कों से दिल खोल कर चुदवाती।

करीब दस दिन के बाद एक शाम रजनी अपनी एक फ्रैंड फातिमा को ले ऑफिस पहुँची। राज! ये मेरी कॉलेज की फ्रैंड फातिमा है, रजनी ने मेरा उससे परिचय कराया।

फातिमा बहुत ही सुंदर थी। पतला बदन, गुलाबी होंठ...... मन करा कि बढ़कर चूस लूँ। उसकी चूचियाँ बहुत बड़ी नहीं थीं पर बनाव अच्छा था। उसने लाइट ब्लू कलर की सलवार कमीज़ और सफ़ेद कलर के बहुत ही ऊँची हील के सैंडल पहन रखे थे। उसकी सुंदरता देखने लायक थी। वो किसी भी टॉप की मॉडल को मात कर सकती थी।

राज! फातिमा का कहना है कि इसके अंकल चुदाई में तुमसे ज्यादा निपुण हैं और मैं कहती हूँ कि तुम हो...... हमने इसी बात पर शर्त लगायी है, रजनी ने कहा।

तो मुझे इस सुंदर हूर को चोदने का मौका मिलने वाला है, यही सोच कर मेरा लंड तनने लगा।

मैं तुम्हें समझाती हूँ कि क्या करना है, सही में मैं जिनकी बात कर रही हूँ वो मेरे अंकल नहीं हैं.... बल्कि वो मेरी अम्मी के प्रेमी हैं और उन्होंने ही मुझे पहली बार चोदा था, फातिमा बोली। वो एक हफ़्ते की छुट्टी पर इस शनिवार को आ रहे हैं और मैं चाहती हूँ कि आप भी उसी रोज़ पहुँचें।

ठीक है हम लोग पहुँच जायेंगे..... पर मेरी बीवी मेरे साथ होगी, मैंने कहा।

बहुत अच्छा, और रजनी ने मुझे बताया कि तुम भी फ़्री सैक्स में विश्वास रखते हो? फातिमा बोली।

हाँ! रजनी ने सही कहा है, मैं शनिवार की टिकटों का इंतज़ाम कर लूँगा।

एक आखिरी बात! हमारे घर में तुम्हें कईंयों को चोदने को मिलेगा..... जैसे मेरी अम्मी, मैं खुद और हमारी दो नौकरानियाँ। इस हिसाब से तुम चार नई चूतों को चोदोगे और तुम सिर्फ़ प्रीती और रजनी को साथ लेकर आओगे!

फातिमा थोड़ा हँसते हुए बोली, इस हिसाब से तुम्हें दो लड़कियों को और साथ लाना होगा.... मेरे अंकल के लिये, जो तुम्हारे लिये कोई मुश्किल काम नहीं होगा। फातिमा एक दम व्यापारी रीत में बोली।

ठीक है!!! मैं इंतज़ाम कर लूँगा, मैंने कहा।

तो ठीक है..... हम लोग शनिवार को स्टेशन पर मिलेंगे, मैं तुम लोगों के साथ ही चलूँगी, कहकर फातिमा चली गयी।

रजनी ने पूछा, किसे साथ लेकर जाने की सोच रहे हो?

आयेशा तो पक्की है, और अगर तुम इंतज़ाम कर पाओ तो टीना को लेकर जाना चाहुँगा, मैंने रजनी की तरफ देखते हुए कहा।

ठीक है, मैं कोशिश करूँगी, ये कहकर रजनी भी चली गयी।

बाद में घर पर मैंने प्रीती से बात की तो प्रीती ने घर में सब को हमारे प्रोग्राम के बारे में बताया। अगर आप इजाज़त दें तो हम सब भी चलना चाहेंगे, राम ने हमारी बात सुनकर कहा, इसी बहाने थोड़ा घूमना भी हो जायेगा, जब से आये हैं, घर में ही घुसे हुए हैं।

अगर फातिमा को आपत्ति नहीं है तो मैं तैयार हूँ। मैंने जवाब दिया।

प्रीती ने तुरंत रजनी को फोन लगाकर फातिमा से बात कराने को कहा।

करीब एक घंटे बाद रजनी टीना को लिये घर में दाखिल हुई। टीना की आँखें एक दम सुर्ख लाल हो रही थी।

ये टीना को क्या हुआ... और ये रो क्यों रही है? मैंने पूछा। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

राज तुमसे बात होने के बाद मैंने घर पहुँच कर टीना को सब बताया तो वो खुशी से उछल पड़ी और अपने पापा से इजाज़त लेने गयी, पर अंकल ने एक दम साफ मना कर दिया। रजनी बोली।

जब टीना ने पूछा कि पर क्यों पापा!.... तो.... अंकल ने ये कहकर साफ मना कर दिया कि तुम जानना चाहती हो कि मैं क्यों ना बोल रहा हूँ..... जब राज ने तुम्हारी चूत और गाँड मारी तो मैं कुछ नहीं कर पाया और अब तुम चाहती हो कि राज के दोस्त भी तुम्हें चोदें...... नहीं! ये मैं कभी नहीं होने दूँगा।

ये सुन टीना बहुत उदास थी और रो रही थी.... इसी लिये मैं इसे यहाँ ले आयी कि कम से कम जाने से पहले एक बार राज से चुदवा लेगी तो इसके मन को ठंडक पड़ जायेगी, रजनी ने कहा।

ये तो तुमने ठीक किया पर क्या फातिमा से तुम्हारी बात हो गयी है? मैंने रजनी से पूछा।

हाँ! मेरी फातिमा से बात हो गयी है, उसका कहना है कि उनका बंगला काफी बड़ा है और उसे या उसकी अम्मी को कोई परेशानी नहीं होगी, रजनी ने जवाब दिया।

रजनी, एक बात बताओ! फातिमा इतनी सुंदर है पर बात करते वक्त इतने ठंडे लहज़े में क्यों बात करती है? मैंने पूछा।

ऐसा कुछ नहीं है, बस जब थोड़ा चिंतित होती है तो उसका व्यवहार ऐसा हो जाता है।

तब तो ठीक है, नहीं तो मैं तो सोच रहा था कि मुझे बर्फ की सिल्ली के समान चूत में ही अपना लंड पेलना पड़ेगा, मैंने कहा।

बर्फ की सिल्ली... मेरी जूती! जब तुम्हारा लंड उसकी चूत में घुसेगा तो तुम्हें लगेगा कि तुम्हारा लंड किसी जलती हुई भट्टी में घुस गया है, रजनी थोड़ा जोर देती हुई बोली।

उसके बाद मैंने दो बार टीना की जम कर चुदाई की और फिर खाना खाकर वो दोनों चली गयीं।

दूसरे दिन मैंने अनिता को अपने प्रोग्राम के बारे में बताया कि मैं आयेशा और वो नयी लड़की ज़ुबैदा को साथ ले जाना चाहता हूँ, तो उसने कहा, सर! आप फ़िक्र ना करें, आप जायें और इंजॉय करें, मैं पीछे सब संभल लूँगी।

हम शनिवार की दोपहर को फातिमा के घर पहुँचे। वो तीन मंज़िला बंगला था। फातिमा ने हमारा परिचय उसकी अम्मी, मिसेज रूही, से कराया। मिसेज रूही सही में बहुत ही सुंदर थीं। उनकी उम्र ४५ के आस पास थी पर वो देखने में फातिमा की बड़ी बहन से ज्यादा नहीं लगती थी। अगर मुझसे कोई उन माँ-बेटी में से एक को चुनने को कहता तो मैं माँ को ही चुनता, उसकी सुंदरता देखने काबिल थी।

आप सब का हमारे घर में वेलकम है, रूही हमारा स्वागत करते हुए बोली, और ये..... उसने अपने पीछे खड़ी हुई दो लड़कियों कि ओर इशारा किया, ये आबिदा और सलमा हैं, जो आप लोगों का हर तरह से खयाल रखेंगी। आबिदा और सलमा को देखकर कोई कह नहीं सकता था कि वो नौकरानियाँ हैं बल्कि वो दोनों किसी मॉडल से कम नहीं लग रही थीं। उनका पहनावा और शृंगार, फतिमा और मिसेज रुही से कम नहीं था।

हम सबने दोपहर का खाना खाकर आराम किया। शाम को फातिमा के अंकल कहो या रूही के प्रेमी, मिस्टर रवि आ गये। रवि देखने में अच्छे थे, लंबा कद, चौड़े बाज़ू और सुंदर चेहरा। कोई भी औरत उनकी तरफ आकर्षित हो सकती थी। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

सब हॉल में इकट्ठे हो जाओ! ड्रिंक्स पंद्रह मिनट में सर्व की जायेंगी, रूही आदेश देती हुई बोली, रवि! बार की कमान तुम संभालो।

थोड़ी ही देर में सब ड्रिंक्स और माहोल का आनंद ले रहे थे।

अच्छी भीड़ जमा कर रखी है इस वक्त? मैंने रवि को रूही से कहते हुए सुना।

ये सब फातिमा के दोस्त हैं, लेकिन अफ़सोस कि इस बार तुम्हारे लिये कोई कोरी चूत नहीं है, रूही हँसते हुए बोली।

इस बार मेरी जान.... मैं तुमसे मिलने आया हूँ ना कि कुँवारी चूत की उम्मीद में, रवि ने अपने ग्लास से घूँट भरते हुए कहा।

खाने की टेबल पर फातिमा ने रवि को अपनी शर्त की बात बतायी। तुम्हें नहीं लगता कि तुम बचकाना हरकत कर रही हो? रवि ने कहा।

यही बात अम्मी और राज ने भी कहीं थी, लेकिन मैंने फैसला कर लिया है कि मैं जान कर रहुँगी! इसलिये प्लीज़... आप हाँ कर दें, फातिमा ने कहा।

रवि! हाँ कर दो ना! तुम्हारा क्या जाने वाला है? रूही चौथा पैग खतम करती हुई बीच में बोली।

ठीक है! अगर तुम्हारी अम्मी कह रही है तो मैं तैयार हूँ, रवि ने कहा, बताओ कैसे आजमाना चाहोगी।

अंकल! आज रात आप रजनी के साथ सोयेंगे और मैं राज के साथ, फातिमा ने बताया, रजनी राज के साथ सो चुकी है और मैं आपके साथ.... सो हम दोनों का बयान ही फैसला करेगा।

जिस तरह उस घर का दस्तूर था, रूही ने फैसला किया कि कौन किसके साथ सोयेगा। रूही ने जोड़ों की घोशना की, राम, आयेशा और अंजू को चोदेगा, श्याम, मंजू और सलमा को, विजय, सिमरन और आबिदा को, और जय, ज़ुबैदा और साक्षी को।

पर आपका और प्रीती का क्या होगा? फातिमा ने पूछा।

कुछ नहीं! हम लोग एक दिन बिना मर्द के रह लेंगे, एक दूसरे को सैटिसफायी करने के लिये हम ही काफी हैं, रूही ने हँसते हुए जवाब दिया।

उस रात जब मैंने अपना लंड फातिमा की चूत में घुसाया तो वो बोली, राज! तुम्हारा लंड कितना लंबा और मोटा है, मुझे लगता है कि मेरी चूत तुम्हारे लंड से पूरी भर गयी है।

उसकी बातों को नज़र अंदाज़ करते हुए मैं उसे धीरे-धीरे चोदने लगा। कभी मैं अपनी रफतार तेज कर देता और कभी धीरे से पेल देता और कभी अचानक ही पूरा लंड एक ही झटके में जड़ तक डाल देता। थोड़ी देर में ही उसे भी पूरा जोश आ गया था, और वो अब अपने कुल्हे उठा कर मेरे धक्कों का साथ दे रही थी।

हाँआआआआ राज!!! इसी तरह चोदो!!!, हाय अल्लाह.... कितना अच्छा लग रहा है!!!!, हाँ और जोर से चोदो!!!! हाँआआआआ ओहहहहह, उसका शरीर अकड़ रहा था और मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है, हाँआआआआ राज!!! और जोर से!!! हाँ ओहहह मेरा छूटाआआ, और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

दो तीन जोर के धक्के और मारने के बाद मेरे लंड ने भी उसकी चूत में पिचकारी छोड़ दी।

उस रात मैंने फातिमा को चार बार चोदा और सुबह फातिमा ने मेरे लंड को ऐसे चूसा कि आज तक मैंने ये अनुभव नहीं किया था।

सुबह नाश्ते की टेबल पर सब इस बात का इंतज़ार कर रहे थे कि फैसला किसके हक में जाता है। राज भी चुदाई कला में माहिर है, मैं फैसला नहीं कर पा रही कि कौन बेहतर है, फातिमा ने कहा।

और यही राय मेरी है, मेरे हिसाब से दोनों ही माहिर हैं, रजनी ने कहा। इस कहानी के लेखक राज अग्रवाल है!

उस दिन हम सब शहर में घूमने गये और देर शाम तक ही लौटे। खाने के बाद फिर ड्रिंक्स का दौर चला और फ़िर रूही ने तय किया कि कौन किसके साथ सोयेगा। रवि के हिस्से में प्रीती और सिमरन आयी, आयेशा और मंजू जय के साथ, विजय को मिली साक्षी और ज़ुबैदा, फातिमा और रजनी राम के साथ, श्याम के साथ अंजू और रूही और मेरे हिस्से में आयी आबिदा और सलमा।

जब हम अपने अपने कमरे में जाने की तैयारी कर रहे थे तो रवि बोला, राज इनसे मसाज करवाना नहीं भूलना!

मसाज क्यों? मैं तो जमकर इनकी चुदाई करना चाहता हूँ! मैंने कहा।

चुदाई तो तुम जब चाहो कर सकते हो, पर मसाज कराकर देखो, तुम्हारी जन्नत की सैर हो जायेगी, इनका मसाज करने का तरीका कुछ अलग ही है, रवि ने कहा।

ठीक है! मैं आजमाना चाहुँगा, मैंने कहा, लेकिन इसके लिये मुझे क्या करना होगा।

कुछ नहीं! बाकी मैं इन्हें समझा दूँगा, रवि ने जवाब दिया।

रात को बिस्तर पर लेटे हुए मैंने देखा कि आबिदा और सलमा, दोनों, सिर्फ हाई पेन्सिल हील के सैंडल पहने, बिल्कुल नंगी मेरे कमरे में दाखिल हुईं। उनके हाथों में एक मोमबत्ती थी और एक कटोरी तेल की थी। उन्होंने मेरे कपड़े उतारे और मुझे पेट के बल लेट जाने को कहा।

आबिदा मेरी जाँघों को मसल रही थी और सलमा थोड़ा सा तेल मेरी पीठ पर डाल कर उसे मसल रही थी। उनके हाथ इस अंदाज़ में चल रहे थे कि वो मुर्दे के शरीर में भी जान फूँक सकते थे।

ओहहहह कितना अच्छा लग रहा है! मैं सिसका। उन्होंने मुझे फिर पलट कर पीठ के बल कर दिया। तब तक मेरा लंड आधा तन ही चुका था।

बिना कुछ कहे वो मेरी छाती पर झुक गयीं और मेरे निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगी। ऐसा मेरे साथ पहले किसी ने नहीं किया था।

ओहहहहहह, मेरे मुँह से सिसकरी निकली। मेरा लंड भी अब तन कर खड़ा हो चुका था।

आबिदा मेरे निप्पल को चूसते हुए नीचे की ओर बढ़ी और वहीं सलमा ने गरम तेल मेरे निप्पल पर डाल दिया। ओहहह जल रहा है, तेल गरम है, थोड़ा ध्यान रखो! मैंने कहा।

आबिदा नीचे होती हुए मेरी जाँघों के भीतरी भाग पर अपनी ज़ुबान से चाट रही थी और वहीं सलमा अपने नाज़ुक हाथों से मेरी छाती की मालिश कर रही थी।

एक की ज़ुबान और दूसरे के हाथ ऐसा मज़ा दे रहे थे कि बयान नहीं कर सकता। थोड़ी देर में सलमा भी मेरी जाँघों के बीच आ कर मेरे लंड के सुपाड़े पर अपनी ज़ुबान घुमाने लगी। वहीं आबिदा मेरी जाँघों के अंदरूनी भाग को चूमे जा रही थी।

वो थोड़ी-थोड़ी देर में अपनी जगह बदल लेतीं। अब सलमा मेरे लंड के सुपाड़े को अपने मुँह में ले चूस रही थी और वहीं आबिदा मेरे अंडवों को मुँह में ले चूस रही थी।

ओहहहहहह सलमाआआआआ चूसती जाओ!!!! ओहहहहह आआआआहहहहह मेरा छूटने वाला है!!!!! मुझसे अब रुकना मुश्किल हो रहा था और मैंने अपना वीर्य सलमा के मुँह में छोड़ दिया।

उस रात मैंने कई बार आबिदा और सलमा को चोदा और जब मेरे लंड में ताकत नहीं रही तो हम एक दूसरे की बाँहों में सो गये।

सुबह मैंने प्रीती से रवि के बारे मैं पूछा, कैसा रहा?

रवि का लंड वाकय में बहुत लंबा और मोटा है और वो चोदता भी तरीके से है, लेकिन मेरे लिये तुम और तुम्हारा लंड सब से ज्यादा अच्छा है, प्रीती ने जवाब दिया।

तुमने इतना कह दिया.... मेरे लिये इतना ही बहुत है, मैंने प्रीती को अपनी बाँहों में भरते हुए कहा।

!!! क्रमशः !!!


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