मैं हसीना गज़ब की

लेखिका: शहनाज़ खान


भाग २


आखिर मैं ताहिर अज़ीज़ खान जी के परिवार का एक हिस्सा बनने जा रही थी। जावेद मुझे बहुत चाहता था। निकाह से पहले हम हर शाम साथ-साथ घूमते फिरते और काफी बातें करते थे। जावेद ने मुझसे मेरे बॉय फ्रेंड्स के बारे में पूछा। और उनसे मिलने से पहले की मेरी सेक्ज़ुअल लाईफ के बारे में पूछा। जब मैंने कहा कि अभी तक कुँवारी हूँ तो हंसने लगे और कहा, क्या यार, तुम्हारी ज़िंदगी तो बहुत बोरिंग है। यहाँ ये सब नहीं चलेगा। एक दो भंवरों को तो रखना ही चाहिये। तभी तो तुम्हारी मार्केट वेल्यू का पता चलता है। मैं उनकी बातों से हँस पड़ी।

निकाह से पहले ही मैं जावेद के साथ हमबिस्तर हो गयी। हम दोनों ने निकाह से पहले खूब सैक्स किया। जावेद के साथ मैं शराब भी पीने लगी और लगभग रोज ही किसी होटल में जाकर सैक्स इंजॉय करते थे। एक बार मेरे पेरेंट्स ने निकाह से पहले रात-रात भर बाहर रहने पर ऐतराज़ जताया था। लेकिन जताया भी तो किससे; मेरे होने वाले ससुर जी से जो खुद इतने रंगीन मिजाज़ थे। उन्होंने उनकी चिंताओं को भाप बना कर उड़ा दिया। ताहिर अज़ीज़ खान जी ने मुझे फ्री छोड़ रखा था लेकिन मैंने कभी अपने काम से मन नहीं चुराया। अब मैं वापस सलवार कमीज़ में ऑफिस जाने लगी।

जावेद और उनकी फैमिली काफी खुले विचारों की थी। जावेद मुझे एक्सपोज़र के लिये जोर देते थे। वो मेरे जिस्म पर रिवीलिंग कपड़े पसंद करते थे। मेरा पूरा वार्डरोब उन्होंने चेंज करवा दिया था। उन्हें मिनी स्कर्ट और लूज़ टॉप मुझ पर पसंद थे। सिर्फ मेरे कपड़े ही नहीं बल्कि मेरे अंडरगार्मेंट्स और जूते-सैंडल तक उन्होंने अपनी पसंद के खरीदवाये। अधिकतर आदमियों की तरह उन्हें भी हाई-हील सैंडलों के लिये कामाकर्षण था।

वो मुझे माइक्रो स्कर्ट और लूज़ स्लीवलेस टॉप पहना कर डिस्को में ले जाते, जहाँ हम खूब फ्री होकर नाचते, शराब पीते और मस्ती करते थे। अक्सर लोफर लड़के मेरे जिस्म से अपना जिस्म रगड़ने लगते। कईं बार मेरे बूब्स मसल देते। वो तो बस मौके की तलाश में रहते थे कि कोई मुझ जैसी सैक्सी हसीना मिल जाये तो हाथ सेंक लें। मैं कईं बार नाराज़ हो जाती लेकिन जावेद मुझे चुप करा देते। कईं बार कुछ मनचले मेरे साथ डाँस करना चाहते तो जावेद खुशी-खुशी मुझे आगे कर देते। मुझ संग तो डाँस का बहाना होता। लड़के मेरे जिस्म से जोंक की तरह चिपक जाते। मेरे पूरे जिस्म को मसलने लगते। बूब्स का तो सबसे बुरा हाल कर देते। मैं अगर नाराज़गी ज़ाहिर करती तो जावेद अपनी टेबल से आँख मार कर मुझे शांत कर देते। शुरू-शुरू में तो इस तरह के खुलेपन में मैं घबरा जाती थी। मुझे बहुत बुरा लगता था लेकिन धीरे-धीरे मुझे इन सब में मज़ा आने लगा और मैं हल्के-फुल्के नशे में खुल कर इस सब में भाग लेने लगी। मैं जावेद को उत्तेजित करने के लिये कभी-कभी दूसरे किसी मर्द को सिड्यूस करने लगती। उस शाम तो जावेद में कुछ ज्यादा ही जोश आ जाता।

खैर हमारा निकाह जल्दी ही बड़े धूम धाम से हो गया। निकाह के बाद जब ताहिर अज़ीज़ खान जी दुआ देते हुए अपने सीने से लगा लिया तो इतने में ही मैं गीली हो गयी। तब मैंने महसूस किया कि हमारा रिश्ता आज से बदल गया है लेकिन मेरे मन में अभी एक छुपी सी चिंगारी बाकी है अपने ससुर जी के लिये, जिसे हवा लगते ही भड़क उठने की उम्मीद है।

मेरे ससुराल वाले बहुत अच्छे और काफी एडवांस्ड विचारों के थे। जावेद के एक बड़े भाई साहब हैं फिरोज़ और एक बड़ी बहन है समीना। दोनों का तब तक निकाह हो चुका था। मेरे नन्दोई का नाम है सलमान। सलमान बहुत रंगीन मिजाज़ इंसान थे। उनकी नजरों से ही कामुक्ता टपकती थी।

निकाह के बाद मैंने पाया कि सलमान मुझे कामुक नजरों से घूरते रहते हैं। नया-नया निकाह हुआ था, इसलिये किसी से शिकायत भी नहीं कर सकती थी। उनकी फैमिली इतनी एडवांस थी कि मेरी इस तरह की शिकायत को हंसी में उड़ा देते और मुझे ही उलटा उनकी तरफ़ ढकेल देते। सलमान की मेरी ससुराल में बहुत अच्छी इमेज बनी हुई थी इसलिये मेरी किसी भी शिकायत को कोई तवज्जो नहीं देता। अक्सर सलमान मुझे छू कर बात करते थे। वैसे इसमें कुछ भी गलत नहीं था। लेकिन ना जाने क्यों मुझे उस आदमी से चिढ़ होती थी। उनकी आँखें हमेशा मेरी छातियों पर रेंगते महसूस करती थी। कईं बार मुझसे सटने की भी कोशिश करते थे। कभी सबकी आँख बचा कर मेरी कमर में चिकोटी काटते तो कभी मुझे देख कर अपनी जीभ को अपने होंठों पर फेरते। मैं नजरें घूमा लेती।

मैंने जब समीना से थोड़ा घूमा कर कहा तो वो हँसते हुए बोली, "दे दो बेचारे को कुछ लिफ्ट! आजकल मैं तो रोज उनका पहलू गरम कर नहीं रही हूँ इसलिये खुला साँड हो रहे हैं। देखना बहुत बड़ा है उनका। और तुम तो बस अभी कच्‍ची कली से फूल बनी हो... उनका हथियार झेल पाना अभी तेरे बस का नहीं।

आपा आप भी बस.... आपको शरम नहीं आती अपने भाई की नयी दुल्हन से इस तरह बातें कर रही हो?

इसमें बुराई क्या है। हर मर्द का किसी शदीशुदा की तरफ़ खिंचाव का मतलब बस एक ही होता है कि वो उसके शहद को चखना चाहता है। इससे कोई लड़की घिस तो जाती नहीं है। समीना आपा ने हंसी में बात को उड़ा दिया। उस दिन शाम को जब मैं और जावेद अकेले थे समीना आपा ने अपने भाई से भी मजाक में मेरी शिकायत की बात कह दी।

जावेद हंसने लगे, अच्छा लगता है जीजा जी का आप से मन भर गया है इसलिये मेरी बेगम पर नजरें गड़ाये रखे हुए हैं।" मैं तो शरम से पानी पानी हो रही थी। समझ ही नहीं आ रहा था वहाँ बैठे रहना चाहिये या वहाँ से उठ कर भाग जाना चाहिये। मेरा चेहरा शरम से लाल हो गया।

अभी नयी है, धीरे-धीरे इस घर की रंगत में ढल जायेगी। फिर मुझे कहा, शहनाज़ हमारे घर में किसी से कोई लिकाव छिपाव नहीं है। किसी तरह का कोई पर्दा नहीं। सब एक दूसरे से हर तरह का मजाक छेड़ छाड़ कर सकते हैं। तुम किसी की किसी हरकत का बुरा मत मानना।

अगले दिन की ही बात है। मैं डायनिंग टेबल पर बैठी सब्ज़ी काट रही थी। सलमान और समीना आपा सोफ़े पर बैठे हुए थे। मुझे खयाल ना रहा कब मेरे एक स्तन से साड़ी का आंचल हट गया। मुझे काम निबटा कर नहाने जाना था, इसलिये ब्लाऊज़ का सिर्फ एक बटन बंद था। आधे से अधिक चूचियाँ बाहर निकली हुई थीं। मैं अपने काम में तल्लीन थी। मुझे नहीं मालूम था कि सलमान सोफ़े बैठ कर न्यूज़ पेपर की आड़ में मेरी चूचियों को निहार रहे हैं। मुझे पता तब चला जब समीना आपा ने मुझे बुलाया।

शहनाज़ यहाँ सोफ़े पर आ जाओ। इतनी दूर से सलमान को तुम्हारा जिस्म ठीक से दिखायी नहीं दे रहा है। बहुत देर से कोशिश कर रहा है कि काश उसकी नजरों की गर्मी से तुम्हारे ब्लाऊज़ का इकलौता बटन पिघल जाये और ब्लाऊज़ से तुम्हारी चूचियाँ निकल जायें, लेकिन उसे कोई कामयाबी नहीं मिल रही है।

मैंने झट से अपनी चूचियों को देखा तो सारी बात समझ कर मैंने आंचल सही कर दिया। मैं शरमा कर वहाँ से उठने को हुई तो समीना आपा ने आकर मुझे रोक दिया और हाथ पकड़ कर सोफ़े तक ले गयी। सलमान के पास ले जा कर उन्होंने मेरे आंचल को छातियों के ऊपर से हटा दिया।

लो देख लो.. ३८ साइज़ के हैं। नापने हैं क्या?

मैं उनकी हरकत से शरम से लाल हो गयी। मैंने जल्दी वापस आंचल सही किया और वहाँ से खिसक ली।

हनीमून में हमने मसूरी जाने का प्रोग्राम बनाया। शाम को कार से दिल्ली से निकल पड़े। हमारे साथ समीना आपा और सलमान भी थे। ठंड के दिन थे। इसलिये शाम जल्दी हो जाती थी। सामने की सीट पर समीना आपा बैठी हुई थी। सलमान कार चला रहे थे। हम दोनों पीछे बैठे हुए थे। दो घंटे लगातार ड्राईव करने के बाद एक ढाबे पर चाय पी। अब जावेद ड्राइविंग सीट पर चला गया और सलमान पीछे की सीट पर आ गये। मैंने सामने की सीट पर जाने के लिये दरवाजा खोला तो सलमान ने मुझे रोक दिया।

अरे कभी हमारे साथ भी बैठ लो.... खा तो नहीं जाऊँगा तुम्हें," सलमान ने कहा।

हाँ बैठ जाओ उनके साथ.... सर्दी बहुत है बाहर। आज अभी तक गले के अंदर एक भी घूँट नहीं गयी है इसलिये ठंड से काँप रहे हैं। तुमसे सट कर बैठेंगे तो उनका जिस्म भी गरम हो जायेगा, आपा ने हँसते हुए कहा।

अच्छा? लगता है आपा अब तुम उन्हें और गरम नहीं कर रही हो, जावेद ने समीना आपा को छेड़ते हुए कहा।

हम लोग बातें करते और मजाक करते चले जा रहे थे। तभी बात करते-करते सलमान ने अपना हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया, जिसे मैंने धीरे से पकड़ कर नीचे कर दिया। ठंड बढ़ गयी थी। जावेद ने एक शाल ले लिया। समीना ने एक कंबल ले लिया था। हम दोन पीछे बैठे ठंड से काँपने लगे।

सलमान देखो.... शहनाज़ का ठंड के मारे बुरा हाल हो रहा है। पीछे एक कंबल रखा है उससे तुम दोनों ढक लो, समीना आपा ने कहा।

अब एक ही कंबल बाकी था जिससे सलमान ने हम दोनों को ढक दिया। एक कंबल में होने के कारण मुझे सलमान से सट कर बैठना पड़ा। पहले तो थोड़ी झिझक हुई मगर बाद में मैं उनसे एकदम सट कर बैठ गयी। सलमान का एक हाथ अब मेरी जाँघों पर घूम रहा था और साड़ी के ऊपर से मेरी जाँघों को सहला रहा था। अब उन्होंने अपने हाथ को मेरे कंधे के ऊपर रख कर मुझे अपने सीने पर खींच लिया। मैं अपने हाथों से उन्हें रोकने की हल्की सी कोशिश कर रही थी।

क्या बात है, तुम दोनों चुप क्यों हो गये। कहीं तुम्हारा नन्दोई तुम्हें मसल तो नहीं रहा है? संभाल के रखना अपने उन खूबसूरत जेवरों को.... मर्द पैदाइशी भूखे होते हैं इनके। कह कर समीना हँस पड़ी। मैं शरमा गयी। मैंने सलमान के जिस्म से दूर होने की कोशिश की तो उन्होंने मेरी कमर को पकड़ कर और अपनी तरफ़ खींच लिया।

अब तुम इतनी दूर बैठी हो तो किसी को तो तुम्हारी प्रॉक्सी देनी पड़ेगी ना और नन्दोई के साथ रिश्ता तो वैसे ही जीजा साली जैसा होता है..... आधी घर वाली..... सलमान ने कहा।

देखा.... देखा.... कैसे उछल रहे हैं। शहनाज़ अब मुझे मत कहना कि मैंने तुम्हें चेताया नहीं। देखना इनसे दूर ही रहना। इनका साइज़ बहुत बड़ा है। समीना ने फिर कहा।

क्या आपा आप भी बस।

अब जावेद अपनी बाँह वापस कंधे से उतार कर कुछ देर तक मेरी अंदरूनी जाँघों को मसलते रहे। फिर अपने हाथ को वापस ऊपर उठा कर अपनी अँगुलियाँ मेरे गालों पर फिराने लगे। मेरे पूरे जिस्म में एक झुरझुरी सी दौड़ रही थी। रोंये भी खड़े हो गये। धीरे-धीरे उनका हाथ गले पर सरक गया। मैं ऐसा दिखावा कर रही थी जैसे सब कुछ नॉर्मल है मगर अंदर उनके हाथ किसी सर्प की तरह मेरे जिस्म पर रेंग रहे थे। अचानक उन्होंने अपना हाथ नीचे किया और साड़ी ब्लाऊज़ के ऊपर से मेरे एक मम्मे को अपने हाथों से ढक लिया। उन्होंने पहले धीरे से कुछ देर तक मेरे एक मम्मे को प्रेस किया। जब देखा कि मैंने किसी तरह का विरोध नहीं किया तो उन्होंने हाथ ब्लाऊज़ के अंदर डाल कर मेरे एक मम्मे को पकड़ लिया। मैं कुछ देर तक तो सकते जैसी हालत में बैठी रही। लेकिन जैसे ही उसने मेरे उस मम्मे को दबाया तो मैं चिहुंक उठी उईईई!!!

क्या हुआ? खटमल काट गया? समीना आपा ने पूछा और मुझे चिढ़ाते हुए हंसने लगी। मैं शरम से मुँह भींच कर बैठी हुई थी। क्या बताती; एक नयी दुल्हन के लिये इस तरह की बातें खुले आम करना बड़ा मुश्किल होता है और खासकर तब जबकि मेरे अलावा बाकी सब इस माहौल का मज़ा ले रहे थे।

कुछ नहीं! मेरे सैंडल की हील फंस गयी थी सीट के नीचे। मैंने बात को संभालते हुए कहा।

अब उनके हाथ मेरे नंगे मम्मों को सहलाने लगे। उनके हाथ ब्रा के अंदर घुस कर मेरे मम्मों पर फिर रहे थे। उन्होंने मेरे निप्पल को अपनी अँगुलियों से छूते हुए मेरे कान में कहा, बाई गॉड... बहुत सैक्सी हो। अगर तुम्हारा एक अंग ही इतना लाजवाब है तो जब पूरी नंगी होगी तो कयामत आ जायेगी। जावेद खूब रगड़ता होगा तेरी जवानी। साला बहुत किसमत वाला है। तुम्हें मैं अपनी टाँगों के बीच लिटा कर रहुँगा।

उनके इस तरह खुली बात करने से मैं घबरा गयी। मैंने सामने देखा तो दोनों भाई बहन अपनी धुन में थे। मैं अपना निचला होंठ काट कर रह गयी। मैंने चुप रहना ही उचित समझा। जितनी शिकायत करती, दोनों भाई बहन मुझे और ज्यादा खींचते। उनकी हरकतों से अब मुझे भी मज़ा आने लगा। मेरी चूत गीली होने लगी। लेकिन मैं चुप चाप अपनी नजरें झुकाये बैठी रही। सब हंसी मजाक में लगे थे। दोनों को इसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उनकी पीठ के ठीक पीछे किस तरह का खेल चल रहा था। मैं नयी नवेली दुल्हन कुछ तो शरम के मारे और कुछ परिवार वालों के खुले विचारों को देखते हुए चुप थी। वैसे मैं भी अब कोई दूध की धुली तो थी नहीं। ससुर जी के साथ हमबिस्तर होते-होते रह गयी थी। इसलिये मैंने मामुली विरोध और कसमसाने के अलावा कोई हरकत नहीं की।

उसने मुझे आगे को झुका दिया और हाथ मेरी पीठ पर ले जाकर मेरी ब्रा के स्ट्रैप खोल दिये। ब्लाऊज़ में मेरे बूब्स ढीले हो गये। अब वो आराम से ब्लाऊज़ के अंदर मेरे बूब्स को मसलने लगे। उसने मेरे ब्लाऊज़ के बटन खोल कर मेरे बूब्स बिल्कुल नंगे कर दिये। सलमान ने अपना सर कंबल के अंदर करके मेरे नंगे मम्मों को चूम लिया। उसने अपने होंठों के बीच एक-एक करके मेरे निप्पल लेकर कुछ देर चूसा। मैं डर के मारे एक दम स्तब्ध रह गयी। मैं साँस भी रोक कर बैठी हुई थी। ऐसा लग रहा था मानो मेरी साँसों से भी हमारी हरकतों का पता चल जायेगा। कुछ देर तक मेरे निप्पल चूसने के बाद उन्होंने वापस अपना सिर बाहर निकाला। अब उन्होंने अपने हाथों से मेरे हाथ को पकड़ लिया। मेरी पतली-पतली अँगुलियों को कुछ देर तक चूसते और चूमते रहे। फिर धीरे से उसे पकड़ कर पैंट के ऊपर अपने लंड पर रखा। कुछ देर तक वहीं पर दबाये रखने के बाद मैंने अपने हाथों से उनके लंड को एक बार मुठ्ठी में लेकर दबा दिया। वो तब मेरी गर्दन पर हल्के-हल्के से अपने दाँत गड़ा रहे थे। मेरे कानों की एक लौ अपने मुँह में लेकर चूसने लगे।

पता नहीं कब उन्होंने अपने पैंट की ज़िप खोल कर अपना लंड बाहर निकाल लिया। मुझे तो पता तब लगा जब मेरे हाथ उनके नंगे लंड को छू गये। मैं अपने हाथ को खींच रही थी मगर उनकी पकड़ से छुड़ा नहीं पा रही थी।

जैसे ही मेरे हाथ ने उसके लंड के चमड़े को छुआ तो पूरे जिस्म में एक सिहरन सी दौड़ गयी। उनका लंड पूरी तरह तना हुआ था। लंड तो क्या, मानो मैंने अपने हाथों में कोइ गरम सलाख पकड़ ली हो। मेरी ज़ुबान तालू से चिपक गयी और मुँह सूखने लगा। मेरे हसबैंड और ननद सामने बैठे थे और मैं नयी दुल्हन एक गैर मर्द का लंड अपने हाथों में थामे हुए थी। मैं शरम और डर से गड़ी जा रही थी। मगर मेरी ज़ुबान को तो मानो लकवा मार गया था। अगर कुछ बोलती तो पता नहीं सब क्या सोचते। मेरी चुप्पी को उसने मेरी रज़ामंदी समझा। उसने मेरे हाथ को मजबूती से अपने लंड पर थाम रखा था। मैंने धीरे-धीरे उसके लंड को अपनी मुठ्ठी में ले लिया। उसने अपने हाथ से मेरे हाथ को ऊपर नीचे करके मुझे उसके लंड को सहलाने का इशारा किया। मैं उसके लंड को सहलाने लगी। जब उन्हें यकीन हो गया तो उन्होंने मेरे हाथ को छोड़ दिया और मेरे चेहरे को पकड़ कर अपनी ओर मोड़ा। मेरे होंठों पर उनके होंठ चिपक गये। मेरे होंठों को अपनी जीभ से खुलवा कर मेरे मुँह में अपनी जीभ घुसा दी। मैं डर के मारे काँपने लगी। जल्दी ही उन्हें धक्का देकर अपने से अलग किया। उन्होंने अपने हाथों से मेरी साड़ी ऊँची करनी शुरू की। उनके हाथ मेरी नंगी जाँघों पर फिर रहे थे। मैंने अपनी टाँगों को कस कर दबा रखा था इसलिये उन्हें मेरी चूत तक पहुँचने में कामयाबी नहीं मिल रही थी। मैं उनके लंड पर जोर-जोर से हाथ चला रही थी। कुछ देर बाद उनके मुँह से हल्की हल्की आआह ऊऊह जैसी आवाजें निकलने लगी जो कि कार की आवाज में दब गयी थी। उनके लंड से ढेर सारा गाढ़ा-गाढ़ा वीर्य निकल कर मेरे हाथों पर फ़ैल गया। मैंने अपना हाथ बाहर निकाल लिया। वो वापस मेरे हाथ को पकड़ कर मुझे जबरदस्ती उनके वीर्य को चाट कर साफ़ करने लिये मजबूर करने लगे मगर मैंने उनकी चलने नहीं दी। मुझे इस तरह की हरकत बहुत गंदी और वाहियात लगती थी। इसलिये मैंने उनकी पकड़ से अपना हाथ खींच कर अपने रुमाल से पोंछ दिया। कुछ देर बाद मेरे हसबैंड कार रोक कर पीछे आ गये तो मैंने राहत की साँस ली।

हम होटल में पहुँचे। दो डबल रूम बूक कर रखे थे। उस दिन ज्यादा घूम नहीं सके। शाम को हम सब उनके कमरे में बैठ कर ही बातें करने लगे। फिर देर रात तक ड्रिंक करते हुए ताश खेलते रहे। जब हम उठने लगे तो सलमान ने हमें रोक लिया।

अरे यहीं सो जाओ.... अब इस हालत में कैसे चल कर अपने रूम तक जाओगे उन्होंने गहरी नजरों से मुझे देखते हुए कहा।

जावेद ने सारी बात मुझ पर छोड़ दी, मुझे क्या है.... इससे पूछ लो।

सलमान मेरी तरफ़ मुस्कुराते हुए देख कर बोले, लाईट बंद कर देंगे तो कुछ भी नहीं दिखेगा और वैसे भी ठंड के मारे रज़ाई तो लेनी ही पड़ेगी।

और क्या कोई किसी को परेशान नहीं करेगा। जिसे अपने पार्टनर से जितनी मरज़ी हो, खेलो, समीना आपा ने कहा।

जावेद ने झिझकते हुए उनकी बात मान ली। मैं चुप ही रही। वैसे भी नशे की हालत में मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था। लाईट ऑफ करके हम चारों एक ही डबल बेड पर लेट गये। मैं और समीना आपा बीच में सोये और दोनों मर्द किनारे पर। जगह कम थी इसलिये एक दूसरे से सट कर सो रहे थे। हम चारों के कपड़े बहुत जल्दी जिस्म से हट गये। हल्की-हल्की रोशनी में मैंने देखा कि सलमान ने समीना आपा को सीधा कर के दोनों पैर अपने कंधों पर रख दिये और धक्के मारने लगे। कंबल, रज़ाई सब उनके जिस्म से हटे हुए थे। मैंने हल्की रोशनी में उनके मोटे तगड़े लंड को देखा। समीना आपा लंड घुसते समय आआह कर उठी। जावेद का लंड उससे छोटा था। मैं सोच रही थी समीना आपा को कैसा मज़ा आ रहा होगा। सलमान समीना आपा को धक्के मार रहा था। जावेद मुझे घोड़ी बना कर मेरे पीछे से ठोकने लगा। पूरा बिस्तर हम दोनों जोड़ों के धक्कों से बुरी तरह हिल रहा था। कुछ देर बाद सलमान लेट गया और समीना आपा को अपने ऊपर ले लिया। अब समीना आपा उन्हें चोद रही थी। मेरे बूब्स जावेद के धक्कों से बुरी तरह हिल रहे थे। थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि कोई हाथ मेरे हिलते हुए बूब्स को मसलने लगा है। मैं समझ गयी कि वो हाथ जावेद का नहीं बल्कि सलमान का है। सलमान मेरे निप्पल को अपनी चुटकियों में भर कर मसल रहा था। मैं दर्द से कराह उठी। जावेद खुश हो गया कि उसके धक्कों ने मेरी चींख निकाल दी। काफी देर तक यूँ ही अपनी अपनी बीवी को ठोक कर दोनों निढाल हो गये।

दोनों जोड़े वहीं अलग अलग कंबल और रज़ाई में घुस कर बिना कपड़ों के ही अपने-अपने पार्टनर से लिपट कर सो गये। मैं और समीना आपा बीच में सोये थे और दोनों मर्द किनारे की ओर सोये थे। आधी रात को अचानक मेरी नींद खुली। मैं ठंड के मारे टाँगों को सिकोड़ कर सोयी थी। मुझे लगा मेरे जिस्म पर कोई हाथ फिरा रहा है। मेरी रज़ाई में एक तरफ़ जावेद सोया हुआ था। दूसरी तरफ़ से कोई रज़ाई उठा कर अंदर सरक गया और मेरे नंगे जिस्म से चिपक गया। मैं समझ गयी कि ये और कोई नहीं सलमान है। उसने कैसे समीना आपा को दूसरी ओर कर के खुद मेरी तरफ़ सरक आया, ये पता नहीं चला। उसके हाथ अब मेरी गाँड पर फिर रहे थे। फिर उसके हाथ मेरे दोनों चूतड़ों के बीच की दरार से होते हुए मेरी गाँड के छेद पर कुछ पल रुके और फिर आगे बढ़ कर मेरी चूत के ऊपर ठहर गये।

मैं बिना हिले डुले चुपचप पड़ी थी। देखना चाहती थी कि सलमान करता क्या है। डर भी रही थी क्योंकि मेरी दूसरी तरफ़ जावेद मुझ से लिपट कर सो रहे थे। सलमान का मोटा लंड खड़ा हो चुका था और मेरे चूतड़ों पर दस्तक दे रहा था।

सलमान ने पीछे से मेरी चूत में अपनी एक फिर दूसरी अँगुली डाल दी। मेरी चूत गीली होने लगी थी। टाँगों को मोड़ कर लेटे रहने के कारण मेरी चूत उसके सामने बिकुल खुली हुई तैयार थी। उसने कुछ देर तक मेरी चूत में अपनी अँगुलियों को अंदर बाहर करने के बाद अपने लंड के गोल टोपे को मेरी चूत के मुहाने पर रखा। मैंने अपने जिस्म को ढीला छोड़ दिया था। मैं भी किसी पराये मर्द की हरकतों से गरम होने लगी थी। उसने अपनी कमर से मेरी चूत पर एक धक्का लगाया।

आआआहहहह, मेरे मुँह से ना चाहते हुए भी एक आवाज निकल गयी। तभी जावेद ने एक करवट बदली।

मैंने घबरा कर उठने का बहाना किया और सलमान को धक्का दे कर अपने से हटाते हुए उसके कान में फुसफुसा कर कहा, प्लीज़ नहीं जावेद जाग गया तो कयामत आ जायेगी

ठहरो जानेमन! कोई और इंतज़ाम करते हैं, कहकर वो उठा और एक झटके से मुझे बिस्तर से उठा कर मुझे नंगी हालत में ही सामने के सोफ़े पर ले गया। वहाँ मुझे लिटा कर मेरी टाँगों को फैलाया। वो नीचे कार्पेट पर बैठ गया। फिर उसने अपना सिर मेरी जाँघों के बीच रख कर मेरी चूत पर जीभ फिराना शुरू किया। मैंने अपनी टाँगें छत की तरफ़ उठा दीं। वो अपने हाथों से मेरी टाँगों को थामे हुए था। मैंने अपने हाथों से उसके सिर को अपनी चूत पर दाब दिया। उसकी जीभ अब मेरी चूत के अंदर घुस कर मुझे पागल करने लगी। मैं अपने बालों को खींच रही थी तो कभी अपनी अँगुलियों से अपने निप्पल को जोर जोर से मसलती। अपने जबड़े को सख्ती से मैंने भींच रखा था जिससे किसी तरह की कोई आवाज मुँह से ना निकल जाये। लेकिन फिर भी काफी कोशिशों के बाद भी हल्की दबी-दबी कराह मुँह से निकल ही जाती थी। मैंने उसके ऊपर झुकते हुए फुसफुसाते हुए कहा, आआहहह ये क्या कर दिया आपने! मैं पागल हो जाऊँगीऽऽऽऽ प्लीऽऽऽऽज़ और बर्दाश्त नहीं हो रहा है.... अब आआआ जाओऽऽऽऽ।

लेकिन वो नहीं हटा। कुछ ही देर में मेरा जिस्म उसकी हरकतों को नहीं झेल पाया और चूत रस की एक तेज़ धार बह निकली। मैं निढाल हो कर सोफ़े पर गिर गयी। फिर मैंने उसके बाल पकड़ कर उसके सिर को जबरदस्ती से मेरी चूत से हटाया।

क्या करते हो। छी-छी इसे चाटोगे क्या? मैंने उसको अपने चूत-रस का स्वाद लेने से रोका।

मेरी चूत तप रही है.... इसमें अपने हथियार से चोद कर शाँत करो। मैंने भूखी शेरनी की तरह उसे खींच कर अपने ऊपर लिटा लिया और उसके लंड को पकड़ कर सहलाने लगी। उसे सोफ़े पर धक्का दे कर उसके लंड को अपने हाथों से पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया। मैंने कभी किसी के लंड को मुँह में लेना तो दूर कभी होंठों से भी नहीं छुआ था। जावेद बहुत जिद करते थे कि मैं उनके लंड को मुँह में डाल कर चूसूँ लेकिन मैं हर बार उनको मना कर देती थी। मैं इसे एक गंदा काम समझती थी। लेकिन आज ना जाने क्या हुआ कि मैं इतनी गरम हो गयी और बहुत नशे में भी थी कि खुद ही सलमान के लंड को अपने हाथों से पकड़ कर कुछ देर तक किस किया। जब सलमान ने मुझे उनके लंड को अपने मुँह में लेने का इशारा करते हुए मेरे सिर को अपने लंड पर हल्के से दबाया तो मैंने किसी तरह का विरोध ना करते हुए अपने होंठों को खोल कर अपने सिर को नीचे की ओर झुका दिया। उनके लंड से एक अजीब तरह की खुश्बू आ रही थी। कुछ देर यूँ ही मुँह में रखने के बाद मैं उनके लंड को चूसने लगी।

अब सारे डर और सारी शरम से मैं परे थी। ज़िंदगी में मुझे अब किसी की चिंता नहीं थी। बस एक जुनून था, एक गर्मी थी जो मुझे झुलसाये दे रही थी। मैं उसके लंड को मुँह में लेकर चूस रही थी। अब मुझे कोई चिंता नहीं थी कि सलमान मेरी हरकतों के बारे में क्या सोचेगा। बस मुझे एक भूख परेशान कर रही थी जो हर हालत में मुझे मिटानी थी। वो मेरे सिर को अपने लंड पर दाब कर अपनी कमर को ऊँचा करने लगा। कुछ देर बाद उसने मेरे सिर को पूरी ताकत से अपने लंड पर दबा दिया। मेरा दम घुट रहा था। उसके लंड से उसके वीर्य की एक तेज़ धार सीधे गले के भीतर गिरने लगी। उसके लंड के आसपास के बाल मेरे नाक में घुस रहे थे। पूरा रस मेरे पेट में चले जाने के बाद ही उसने मुझे छोड़ा। मैं वहीं जमीन पर भरभरा कर गिर गयी और तेज़-तेज़ सांसें लेने लगी।

वो सोफ़े पर अब भी टाँगों को फैला कर बैठा हुआ था। उसके सामने मैं अपने गले को सहलाते हुए जोर-जोर से साँसें ले रही थी। उसने अपने पैर को आगे बढ़ा कर अपने अंगूठे को मेरी चूत में डाल दिया। फिर अपने पैर को आगे पीछे चला कर मेरी चूत में अपने अंगूठे को अंदर बाहर करने लगा। बहुत जल्दी उसके लंड में वापस हरकत होने लगी। उसने आगे की ओर झुक कर मेरे निप्पल पकड़ कर अपनी ओर खींचे तो मैं दर्द से बचने के लिये उठ कर उसके पास आ गयी। अब उसने मुझे सोफ़े पर हाथों के बल झुका दिया। पैर कार्पेट पर ही थे। अब मेरी टाँगों को चौड़ा करके पीछे से मेरी चूत पर अपना लंड सटा कर एक जोरदार धक्का मारा। उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर रास्ता बनाता हुआ घुस गया। चूत बुरी तरह गीली होने के कारण ज्यादा परेशानी नहीं हुई। बस मुँह से एक दबी-दबी कराह निकली आआआहहहह उसके लंड का साइज़ इतना बड़ा था कि मुझे लगा कि मेरे जिस्म को चीरता हुआ गले तक पहुँच जायेगा।

अब वो पीछे से मेरी चूत में अपने लंड से धक्के मारने लगा। उसके हर धक्के से मेरे मोटे-मोटे बूब्स उछल- उछल जाते। वो मेरी गर्दन को टेढ़ा करके मेरे होंठों को चूमने लगा और अपने हाथों से मेरे दोनों मम्मों को मसलने लगा। काफी देर तक इस तरह मुझे चोदने के बाद मुझे सोफ़े पर लिटा कर ऊपर से ठोकने लगा। मेरी चूत में सिहरन होने लगी और दोबारा मेरा चूत-रस निकल कर उसके लंड को भिगोने लगा। कुछ ही देर में उसका भी वीर्य मेरी चूत में फ़ैल गया। हम दोनों जोर-जोर से सांसें ले रह थे। वो मेरे जिस्म पर पसर गया। हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे।

तभी गजब हो गया.......

जावेद की नींद खुल गयी। वो पेशाब करने उठा था। हम दोनों की हालत तो ऐसी हो गयी मानो सामने शेर दिख गया हो। सलमान सोफ़े के पीछे छिप गया। मैं कहीं और छिपने की जगह ना पा कर बेड की तरफ़ बढ़ी। किसमत अच्छी थी कि जावेद को पता नहीं चल पाया। नींद और नशे में होने की वजह से उसका दिमाग ज्यादा काम नहीं कर पाया होगा। उसने सोचा कि मैं बाथरूम से होकर आ रही हूँ। जैसे ही वो बाथरूम में घुसा सलमान जल्दी से आकर बिस्तर में घुस गया।

कल सुबह कोई बहाना बना कर होटल में ही पड़े रहना, उसने मेरे कान में धीरे से कहा और समीना की दूसरी ओर जा कर लेट गया।

कुछ देर बाद जावेद आया और मेरे से लिपट कर सो गया। मेरी चूत से अभी भी सलमान का रस टपक रहा था। मेरे मम्मों का तो मसल-मसल कर और भी बुरा हाल कर रखा था। मुझे अब बहुत पछतावा हो रहा था। क्यों मैं जिस्म की गर्मी के आगे झुक गयी? क्यों किसी गैर-मर्द से मैंने रिश्ता बना लिया। अब मैं एक गर्त में गिरती जा रही थी जिसका कोई अंत नहीं था। मैंने अपने जज़्बातों को कंट्रोल करने की ठान ली। अगले दिन मैंने सलमान को कोई मौका ही नहीं दिया। मैं पूरे समय सबके साथ ही रही जिससे सलमान को मौका ना मिल सके। उसने कईं बार मुझसे अकेले में मिलने की कोशिश की मगर मैं चुपचाप वहाँ से खिसक जाती। वैसे उसे ज्यादा मौका भी नहीं मिल पाया था। हम तीन दिन वहाँ इंजॉय करके वापस लौट आये। हनीमून में मैंने और कोई मौका उसे नहीं दिया। कईं बार मेरे जिस्म को मसल जरूर दिया था उसने, लेकिन जहाँ तक चुदाई की बात है, मैंने उसकी कोई प्लैनिंग नहीं चलने दी।

!!! क्रमशः !!!


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